Tuesday, 14 August 2018

जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता!


जन गण मन, हिंदुस्तान का राष्ट्रगान है जो मूलतः बंगाली में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखा गया था हिंदुस्तान का राष्ट्रीय गीत वन्दे मातम‌ है।

(राष्ट्रीय गान )

जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता!
पंजाब सिन्ध गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग
विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छल जलधि तरंग
तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे,
गाहे तव जय गाथा।
जन गण मंगलदायक जय हे भारत भाग्य विधाता!

जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे।।



(राष्ट्रीय गीत)

वन्‍दे मातरम गीत बंकिम चन्‍द्र चटर्जी द्वारा संस्‍कृत में रचा गया है; यह स्‍वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्ररेणा का स्रोत था। इसका स्‍थान जन गण मन के बराबर है। इसे पहली बार 1896 में भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के सत्र में गाया गया था। इसका पहला अंतरा इस प्रकार है:

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!
सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,
शस्यश्यामलाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्!
शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥




(जय जय भारत माता!)

जय जय भारत माता!
तेरा बाहर भी घर-जैसा रहा प्यार ही पाता॥
ऊँचा हिया हिमालय तेरा,
उसमें कितना दरद भरा!
फिर भी आग दबाकर अपनी,
रखता है वह हमें हरा।
सौ सौतो से फूट-फूटकर पानी टूटा आता॥
जय जय भारत माता !
कमल खिले तेरे पानी में,
धरती पर हैं आम फले।
उस धानी आँचल में आहा,
कितने देश-विदेश पले।
भाई-भाई लड़े भले ही, टूट सका क्या नाता॥
जय जय भारत माता!
मेरी लाल दिशा में ही माँ,
चन्द्र-सूर्य चिरकाल उगे।
तेरे आंगन में मोती ही,
हिल-मिल तेरे हंस चुगें।
सुख बढ़ जाता, दुःख घट जाता, जब वह है बंट जाता॥
जय जय भारत माता!
तेरे प्यारे बच्चे हम सब,
बंधन में बहु वार पड़े,
किन्तु मुक्ति के लिए यहाँ हम,
कहाँ न जूझे, कब न लड़े।
मरण शान्ति का दाता है, तो जीवन क्रांति-विधाता। ।
जय जय भारत माता!
- मैथिलीशरण गुप्त







(है सरल आज़ाद होना,)

है सरल आज़ाद होना,
पर कठिन आज़ाद रहना।
राष्ट्र राष्ट्र से तूने कहा है
क्रोध निर्बलता ह्रदय की,
स्वार्थ है संताप की जड़,
शील है अनमोल गहना।।
है सरल आज़ाद होना,
पर कठिन आज़ाद रहना।
यह न समझो मुक्ति पाकर
कर चुके कर्तव्य पूरा
देश को श्री शक्ति देने
के लिए है कष्ट सहना
है सरल आज़ाद होना,
पर कठिन आज़ाद रहना।
देश को बलयुक्त करने
यदि ना संयम से चले हम
काल देगा दासता की
फिर हमें जंजीर पटना।
है सरल आज़ाद होना,
पर कठिन आज़ाद रहना।
भीत हो कानून से मन
राह पर आता नहीं है,
अग्रसर होना कुपथ पर
वासना का मान कहना।
है सरल आज़ाद होना,
पर कठिन आज़ाद रहना।
मानकर आदेश तेरा
ले अहिंसा पथ ग्रहण कर,
बंद होगा भूमि पर तब,
मानवों  का रक्त बहना।
है सरल आज़ाद होना,
पर कठिन आज़ाद रहना।
-हरिकृष्ण प्रेमी



क्या हमारा देश वाकय में आजाद है , आइये जानते है?







दोस्तों आपके के हिंदी विचार ब्लॉग में  आप सभी का स्वागत है और  साथ ही स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाये एवं बधाई  देता हूँ!

 दोस्तों आज देश को आजाद हुए 71 साल हो गए लेकिन आजादी के जिन मायनों के सपने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और स्वाधीनता संग्राम के सेनानियों ने देखे थे वो आज भी अधूरे हैं।

देश की करीब आधी आबादी आज भी रोटी, कपड़ा, मकान, साफ पानी, शौचालय, शुद्ध हवा, बुनियादी शिक्षा और बुनियादी स्वास्थ्य सेवा के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

भारत रोजगार 2016 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल 11 करोड़ 70 लाख बेरोजगार थे। 26 नवंबर, 1949 को जब देश ने संविधान लागू किया था, तब यह घोषणा की थी कि हम संवैधानिक प्रावधानों के दायरे में रहकर देश के समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय दिलाएंगे।




उन्हें अवसर की समानता उपलब्ध कराएंगे, राष्ट्रीय एकता और अखंडता सुनिश्चित कराएंगे, गैरबराबरी वाला समतामूलक समाज की स्थापना करेंगे मगर करीब सात दशक बाद भी संविधान की यह आत्मा कागजों पर ही अंकित रह गई है और असल में सामाजिक-आर्थिक और राजनैतिक न्याय की भावना गुम हो चुकी है।

आज भी देश इन समस्याओं से आजादी की बाट जोह रहा है-

भय, भूख, भ्रष्‍टाचार – स्वाधीनता के सात दशक बाद भी हम भय के साए में जीने को विवश हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के साथ अपराध की घटनाओं में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक बलात्कार के मामले साल 2015 की तुलना में 2016 में 12.4% बढ़े हैं। 2016 में 38,947 बलात्कार के मामले देश मे दर्ज हुए थे।




साल 2018 तक इस आंकड़े के और बढ़ने की आशंका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी के बाद से साइबर क्राइम में काफी तेजी आई है।

साल 2014 में साइबर क्राइम के कुल 9,622 मामले दर्ज किए गए जो बढ़कर 2015 में 11 हजार 592 तक पहुंच गया। साल 2016 में साइबर क्राइम का आंकड़ा 12 हजार 317 तक पहुंच चुका है।

हम भले ही खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड बनाकर अपनी पीठ थप-थपा लेते हैं, मगर आज भी भूख और कुपोषण से मौतों की खबर आना और सरकारी मशीनरी का उसे छुपाने की जुगत में लगना ऐसी उपलब्‍ध‍ियों पर काल‍िख पोत देता है।




बेतुके कानूनों की जंजीर और कई अच्‍छे कानून का दुरुपयोग – देश में बेतुके कानूनों की भरमार है जो ब्रिटिश काल में बनाए गए थे। इनमें से कुछ कानूनों को केंद्र सरकार ने खत्म किया है।

पिछले साल ही केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ऐसे बेतुके पुराने 1824 कानूनों को चिन्हित करने की बात कही थी।

मोदी सरकार ने अबतक ऐसे ही कुल 1200 कानून खत्म किए हैं जबकि पूर्ववर्ती सरकारों ने भी लगभग 1300 कानून खत्म किए हैं।

हाल ही में मोटर व्हीकल एक्ट संशोधन हुआ है। पुराने इंडियन मोटर व्हीकल एक्ट 1914 की बानगी देखिए- उस कानून के तहत आंध्र प्रदेश में एक इंस्पेक्टर के दांत बिल्कुल दूध की तरह चमकते होने चाहिए थे लेकिन उसकी छाती सिकुड़ी हुई, घुटने सटे हुए और पंजे हथौड़े की तरह हुए तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता था।




जहां ऐसे बेतुके कानूनों से आजादी की जरूरत है, वहीं कुछ अच्‍छे कानूनों के दुरुपयोग से मुक्‍त‍ि द‍िलाना भी चुनौती बन गया है।

देश में कई कानून खास इसी मकसद से बनाए गए क‍ि मह‍िलाओं, अनुसूच‍ित जात‍ि/जनजात‍ि और दल‍ितों के ल‍िए सुरक्षा का पुख्‍ता इंतजाम क‍िया जाए। पर इन कानूनों का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है।

दहेज व‍िरोधी कानून, घरेलू हिंसा कानून, एससी-एसटी एक्‍ट आद‍ि कई कानूनों का दुरुपयोग धड़ल्‍ले से हो रहा है। यह हमें कानूनी व‍िसंगत‍ियों की जंजीरों से मुक्‍त नहीं होने दे रहा और न्‍याय व्‍यवस्‍था में लोगों का भरोसा ड‍िगा रहा है।




आरक्षण का राजनीतिक इस्‍तेमाल –संविधान का अनुच्छेद 15(4) सरकार को यह इजाजत देता है कि सामाजिक, शैक्षणिक व आर्थिक रूप से पिछड़े या अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए विशेष प्रावधान किया जा सकता है।

इसी के तहत राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए अनुसूचित जाति और जनजाति को लोगों को 10 सालों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र आवंटित किए गए थे लेकिन हर 10 साल के बाद संविधान संशोधन के जरिए इन्हें बढ़ा दिया जाता है।

1953 में काका कालेलकर समिति की सिफारिश पर एससी-एसटी समुदाय को नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण दिया गया। बाद में 1990 में मंडल आयोग की सिफारिश पर वीपी सिंह ने ओबीसी समुदाय को आरक्षण लागू किया लेकिन बाद में चलकर यह सियासी मसला बन गया।

राजनीतिक पार्टियों ने जातीय आधारित आरक्षण व्यवस्था को दलगत राजनीतिक वोट बैंक समझ लिया।




हिंदू-मुसलमान का भेद – 1947 में जब देश आजाद हुआ तब भारत-पाक विभाजन के बाद देश दंगों की आग में झुलस उठा लेकिन 71 साल बाद आज भी देश हिन्दू-मुसलमान के भेद से उबर नहीं सका है। दोनों ही तरफ से ध्रुवीकरण की कोशिशें जारी हैं और जारी हैं इनके सियासी लाभ उठाने का सिलसिला।

हाल ही में असम में एनआरसी के मामले को भी हिन्दू-मुस्लिम का रंग दिया गया। देश के कई हिस्सों में हर साल कई धार्मिक मौकों पर साम्प्रदायिकता का जहर असर दिखाता रहता है।

हालांकि, एनसीआरबी के आंकड़े कहते हैं कि साल 2015 की तुलना में 2016 में दंगों की संख्या में 5 प्रतिशत की कमी आई है मगर मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक हालात के मद्देनजर दोनों समुदायों में दूरी बढ़ी है।

नाकाबिल जनप्रतिनिधियों को झेलने की मजबूरी – 68 साल के गणतांत्रिक इतिहास में भारतीय संसद और राज्यों की विधानसभाएं नाकाबिल और अपराधी किस्म के जनप्रतिनिधियों को झेलती रही है।

भारत में दुनिया का सबसे मजबूत लोकतंत्र माना जाता है मगर आज भी संसद में दागियों की भरमार है। एसोसिएशन ऑफ़ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक 2014 में लोकसभा में चुन कर आए 542 सांसदों में से 185 यानी 34 फीसदी सांसदों के नाम आपराधिक मुकदमा दर्ज है ।

इसी रिपोर्ट के मुताबिक 185 में से 112 सांसदों पर तो गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। अभी तक ऐसी व्‍यवस्‍था का इंतजार ही है ज‍िसके तहत अगर चुना हुआ जनप्रत‍िन‍िध‍ि काम न कर रहा हो तो उसे हटा कर पांच साल से पहले दूसरा जनप्रत‍िन‍िध‍ि चुना जाए।




वोट बैंक की राजनीति – सभी राजनीतिक दल जन कल्याण की बातें करते हैं मगर असलियत में वोट बैंक की राजनीति करते हैं।

तीन तलाक, एससी-एसटी एक्ट में संशोधन, ओबीसी बिल या महिला आरक्षण बिल कुछ ऐसे उदाहरण हैं जो राजनीतिक दलों ने अपने-अपने समय पर अपने-अपने वोट बैंक की राजनीति के लिहाज से गढ़े हैं और उसे पास कराने या नहीं कराने पर राजनीति की है। सर्वसमाज के जन कल्याण की भावना राजनीतिक दलों के लिए अभी भी दूर की कौड़ी है।

महंगा इलाज, महंगी पढ़ाई – भारत में स्वास्थ्य सेवा बड़ी लचर हालत में है। यहां बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका से भी बदतर स्थिति है।

अमेरिकी हेल्थ जर्नल ‘लैंसेट’ के अध्ययन के अनुसार, भारत 195 देशों की सूची में भारत अपने पड़ोसी देश चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान से पीछे रहकर 145वें पायदान पर है। भारत में इलाज भी बहुत महंगा है।

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक महंगे इलाज के चक्कर में गंभीर बीमारी के शिकार 32% लोग हर साल गरीबी रेखा के नीचे पहुंच जाते हैं। इसी साल सुप्रीम कोर्ट भी महंगे इलाज पर चिंता जता चुका है। शिक्षा भी बहुत महंगी है और धीरे-धीरे निजी हाथों में जा रही है।




सरकारी विश्वविद्यालयों में सालों से शिक्षक नहीं हैं जबकि निजी विश्वविद्यालय मोटी फीस वसूलकर भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं। अभी हाल ही में उत्तराखंड में मेडिकल शिक्षा की फीस 300 गुना बढ़ा दी गई थी। पांच लाख रुपये की ट्यूशन फीस बढ़ाकर 19.76 लाख कर दी गई थी।

मैं, मेरा वाली भावना – देश के हु्क्मरान हों या जन प्रतिनिधि या फिर आम नागरिक। सभी ‘मैं’ की परिधि से बाहर नहीं निकल सके हैं। सभी आत्मकेंद्रित होकर अपने विकास की बात सोचते हैं जबकि राष्ट्र निर्माण वसुधैव कुटुम्बकम से ही संभव है।

जब सभी लोग जातीय, क्षेत्रीय या धार्मिक किलेबंदी से बाहर निकलेंगे, तभी आजादी के मायने साकार हो सकेंगे।

सोच कि सरकारी माल मतलब बेदर्दी से इस्‍तेमाल – देश में आज भी सरकारी संसाधनों के बेजा इस्तेमाल हो रहा है। लोग सरकारी चीजों का बेदर्दी से इस्तेमाल ही नहीं दुरुपयोग कर रहे हैं। सरकारी बसें, रेल में लोग बिना टिकट के सफर करते हैं।

सरकारी दफ्तरों में लोग बिना सोचे समझे बिजली के उपकरणों, गाड़ियों, सिस्टम या अन्य सामानों का अंधाधुंध दुरुपयोग करते हैं। इनका दुरुपयोग देश पर आर्थिक बोझ बढ़ाता है।

व‍िरोध के नाम पर जहां जनता ही सार्वजन‍िक संपत्‍त‍ि बर्बाद कर देती है, वहीं शासन-प्रशासन के नाम पर नेता शाहखर्ची में जुटे हैं।




जल, जंगल, जमीन, जीवन की बर्बादी गांवों की अनदेखी – विकास के नाम पर बेतहाशा जंगलों की कटाई हुई। जमीन अधिग्रहण किए गए। जल स्रोत का दुरुपयोग हुआ। प्राकृतिक संसाधनों का बेजा इस्तेमाल किया गया और इस पूरी प्रक्रिया में गांवों की अनदेखी की गई।

नतीजतन न सिर्फ पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ा बल्कि गांव के गांव खाली हो गए और शहरों में अचानक भीड़ जमा हो गई। व‍िकास एक सीम‍ित इलाकों तक सि‍मट कर रह गई है। यह हमें प्रदूषण और संसाधनों की कमी के जंजाल में लगातार जकड़ रहा है।

बेतरतीब विकास के नाम पर बढ़ते शहर और वहां बढ़ती भीड़ – आज देश की करीब 34 फीसदी आबादी शहरों में निवास करती है।

साल 2011 से यह 3 फीसदी बढ़ी है। 1901 में शहरी आबादी मात्र 11 फीसदी थी। आजादी के बाद शहरीकरण और शहरी आबादी में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है।




आजादी के वक्त देश में चार बड़े शहर थे जो महागनर कहलाते थे लेकिन मौजूदा दौर में 15 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की संख्या 25 हो गई है। शहरी चकाचौंध और ग्रामीण इलाकों में बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी ने शहरों में भीड़ बढ़ा दी है।

यह भीड़ यहां काल बनकर आई हैं, जहां इस तरह की संक्रेंद्रित आबादी के लिए मूलभूत सुविधाओं का भी संकट है।






Monday, 13 August 2018

शारीरिक कद(लम्बाई) बढ़ाने के रामवाण उपाए.







नमस्कार दोस्तों कैसे है आप उम्मीद है आप अच्छे और स्वास्थ्य ही होंगे. दोस्तों आज के इस लेख में हम जानेगे की कैसे हम अपनी रुकी हुई शारीरिक कद को बड़ा सकते है!

हमारे शरीर में लम्बाई हमारी पर्सनालिटी का अहम हिस्सा है जिनका कद लंबा होता है वो दिखने में आकर्षक लगते है इसलिए लड़का हो या लड़की हर कोई चाहता है की उनकी हाईट कम न रहे।

Read this- The real love story of life.

आजकल छोटी उम्र में ही बच्चे अपनी कम हाइट को लेकर परेशान होने लगते है।किसी का कद ऊंचा हो या छोटा, ये कई बातों पर निर्भर करता है जैसे खान पान, जैनेटिक्स और हमारी दिनचर्या में किये जाने वाला शारीरिक परिश्रम।

ऐसी बहुत सी चीजे है जिससे हम लंबाई बढ़ाने के उपाय कर सकते है जैसे योगा, एक्सरसाइजेज और हमारी डाइट।




आज इस लेख में जानेंगे लंबाई बढ़ने के घरेलू नुस्खे, आयुर्वेदिक दवा और जल्दी कद लंबा करने के लिए क्या खाये, height increase tips in hindi.

Read this- दिमाग तेज करने के आसान उपाए

हाइट कम होने के कारण

हाइट बढ़ाने से पहले ये जानना जरुरी है की आपकी हाइट कम क्यों है। लंबाई कम रहने के दो बड़े कारण है –
पहला जेनेटिक और
दूसरा हार्मोन्स की ग्रोथ कम होना।

जिस परिवार में माता पिता का कद छोटा होता है उनके बच्चों का कद भी अधिकतर कम ही होता है जिसे जेनटिक कारण कहते है पर इसका मतलब ये नहीं की जिसकी हाइट कम है वो बढ़ नहीं सकती।

जिन लड़के और लड़कियों की लम्बाई कम होती है वो अपने आप को औरों से कम आँकते है और हमेशा अपनी हाइट बढ़ने के बारे में सोचते रहते है।




अगर आप भी अपनी लंबाई को बढ़ानाचाहते हैं तो इन फ़ूड को खाये, ये हमारे शरीर में हार्मोन को बैलेंस करने में मदद करती है।

Read this-  तू यह नहीं कर सकता , एक प्रेणादायक कहानी

1. पालक में केल्शियम, फाइबर, विटामिन्स और आयरन भरपूर होता है जिससे हमारी मांसपेशियों को ताकत मिलती है और ये kad lamba करने में भी असरदार है। डाइट में पालक को शामिल कर के आपकी हाइट बढ़ सकती है। इसे पका कर सब्जी बना कर खा सकते है।

2. ब्रोकोली एक ऐसी सब्जी है जो फूलगोभी जैसी दिखती है पर इसका रंग हरा होता है। इस सब्जी में विटामिन सी और आयरन अधिक होता है जो शरीर में खून बढ़ाने के साथ साथ कैंसर सेल्स से लड़ने में भी मदद करता है।

3. शलगम हाइट बढ़ाने वाले हार्मोन को बढ़ावा देती है। इसमें विटामिन, मिनरल्स, प्रोटीन्स और फाइबर होते है। आप इसकी सब्जी बना कर खा सकते है या फिर इसका जूस पी सकते है। शलगम को कच्चा भी खाया जा सकता है।

4. बीन्स में कई प्रकार के पोषक तत्व होते है जैसे फाइबर, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन जो बॉडी में height harmons growth को बढ़ावा देते है।




5. हर रोज सोयाबीन वड़ी खाना भी लम्बाई बढ़ाने में मददगार है। सोयाबीन में प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है जो हमारे शरीर की मांसपेशियों और टीशू को मजबूत करता है। प्रोटीन के इलावा इसमें विटामिन्स, कर्बोहाइड्रेट और फाइबर भी भरपूर होता है। इसे आप उबाल कर या फिर सब्जी बना कर खा सकते है।

6. हम सब जानते है की गाजर खाने से शरीर में खून बढ़ता है पर इसके इलावा ये कद लंबा करने में भी मददगार है।

7. बंदगोभी जिसे हम छोटी गोभी के नाम से भी जानते है, इसमें मौजूद प्रोटीन, विटामिन्स,आयरन, फाइबर और मिनरल्स हाइट हारमोन को बढ़ाते है, इसके इलावा ये कैंसर सेल्स का खात्मा करने में असरदार है।

Read this-  इंटरव्यू देने से पहले इन बातों का ध्यान रखे ...एक छोटा सा लेख


लम्बाई बढ़ाने की आयुर्वेदिक दवा : अश्वगंधा से हाइट बढ़ाने के टिप्स
अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक औषधी है जिसे जिनसेंग भी कहते है और इसमें ऐसे पोषक तत्व होते है जो हड्डियों को बढ़ने में मदद करते है और शरीर में हाइट हार्मोन्स की ग्रोथ भी बढ़ती है।

रोजाना रात को सोने से पहले गाय के दूध में एक से दो चम्मच अश्वगंधा पाउडर मिला कर पिए। इसके सेवन से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक या डॉक्टर से सलाह जरूर ले।




अश्वगंधा आपको baba ramdev पतंजली स्टोर से या फिर किसी पंसारी की दुकान से आसानी से मिल जाएगी।

Read this-  यू वक्त कट जाता पता ही नहीं चलता .....एक प्रेम कहानी

लंबाई बढ़ाने के योगा और एक्सरसाइज

चाहे आप को अपना वजन कम करना हो या बढ़ाना हो या फिर आपको अपनी हाइट बढ़ानी हो, शरीर में किसी भी प्रकार के बदलाव लाने में योग और एक्सरसाइज करने से जल्दी फायदा मिलता है।

Lambayi badhane के लिए रनिंग, स्विमिंग, रस्सा कूद, किसी पाइप पर लटकना और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कर सकते है।

अगर आप जिम जाते है और अपनी लंबाई बढ़ने के प्रयास कर रहे है तो अपने ट्रेनर से इस बारे में जरूर बात करे ताकि वो आपको ऐसा कोई भी वर्कआउट न करवाये जिससे हाइट रुक जाये

अक्सर कुछ लड़के और लड़कियों के सवाल होते है की क्या 19 साल की उम्र में हाइट बढ़ सकती है या फिर 25 की ऐज में height badhane ke liye kya upay aur tarike kare.

दोस्तों किसी भी उम्र में लंबाई का बढ़ना और रुकना उसके कारणों पर निर्भर करता है।




कई बार जेनेटिक कारणों की वजह से तमाम कोशिश करने के बाद भी हाइट नहीं बढ़ पाती, पर जादातर गलत जीवनशैली और खान पान की वजह से लंबाई बढ़नी रूक जाती है जो कुछ उपाय करने के बाद फिर से बढ़ने लगती है।

Read this-  आलस्य को दूर करने के उपाए.....

ज्यादातर लोग जल्दी लंबाई बढ़ाने की दवा के बारे में जानना चाहते है पर दोस्तों ऐसी कोई मेडिसिन  या उपचार नहीं है जिसे खाने से आपकी हाइट बढ़ जाएगी।




दोस्तों यदि आपको यह लेख केसा लगा आप कमेंट कर बात सकते और अच्छा लगा तो जरूर नीचे दिख  रहे सोशल मीडिया बटन पर क्लिक कर इस लेख को आप फेसबुक आदि साइट पर शेयर कर सकते है .....धन्यवाद


Friday, 10 August 2018

Robots.txt File कैसे बनाये ......hindivichar597.online






यदि आप एक ब्लॉगर या आपने अभी ब्लॉगिंग करना शुरू किया है तो ऐसे मे आपने जरुर सुना होगा blogger या wordpress मे robots.txt file के बारे मे , रोबोट्स के बारे आप जानते ही होगे रोबोट ये एक तराह का मशीन होता है और ये हमारे कमांड को फॉलो करता है यही काम robots.txt फाइल का होता है जो भी कमांड हम इस file को देंगे ये उसे सीधा सर्च इंजन को ये कमांड भेज देता है जैसा की आप जानते ही है सर्च इंजन का काम होता है आपके पोस्ट को लोगो के सर्च किये अनुसार दीखाना और आपके पोस्ट को इंडेक्स करना तो आइये अच्छे से जानते लेते है इसके बारे मे.

Robots.txt File क्या होता है
जैसे की नाम से ही आपको पता चल रहा है की .txt ये एक टेक्स्ट फाइल का extension है जिसमे हम सिर्फ टेक्स्ट लीख सकते है इसी तराह  robots.txt एक file है जिसमे हम कुछ टेक्स्ट या मेसेज लिखते है इस मेसेजमे हम अपने ब्लॉग के पार्ट्स के बारे मे लिखते है की कोनसा पार्ट सर्च इंजन मे दिखाना है और कोनसा नहीं !




उदाहरण के लिए यदि आप अपने ब्लॉग से पेज को सर्च इंजन मे नहीं दिखाना चाहते है या फिर आप चाहते है की आपके ब्लॉग मे category या tags को index ना करे तो ये सब चीज़े आप robots.txt file के अन्दर लीख सकते है उसकी बाद जब भी कोई search इंजन जेसे की google,yahoo,bing आपके ब्लॉग के पोस्ट को इंडेक्स करना शुरू कर देगा तो उसे robots.txt file के तरफ से इन सभी सर्च इंजनो को एक मेसेज यानि कमांड जायेगा की ब्लॉग से इन सब चीजों को इंडेक्स करो और इन सब चीजों को इंडेक्स मत करो इससे ये फायदा होता है ये आपके ब्लॉग को seo फ्रेंडली बना देता है और इससे सर्च इंजन को आसानी हो जाती है की कोनसा पार्ट index करे और कोनसा नहीं.




Blogger मे  Robots.txt File कैसे add करे
ब्लॉगर मे आपको robots.txt file का आप्शन setting मे जाके search preferences के अन्दर मिलेगा जब हम अपने blogspot ब्लॉग को SEO friendly बनाते है तब हमें ये robots.txt file का आप्शन मिलता है जिसे ज्यातर लोग ऐसे ही छोड़ है वैसे ब्लॉगर मे आप इस आप्शन को इसे छोड़ देंगे तो blogger अपने आप आपके लिए बेस्ट robots.txt file बना देता है लेकिन यदि आप चाहते है की कुछ पार्ट्स आपके ब्लॉग से सर्च इंजन मे हाईड हो तो तब आप उसे कर सकते है लेकिन यदि आप ब्लॉगिंग को seriously ले रहे है और आपने बाद मे अपने blogspot ब्लॉग को wordpress मे माइग्रेट करलिया तब आप इस फीचर का यूज़ जरुर करे




आइये अब सीखते है की blogspot ब्लॉग मे इस फाइल को कैसे ऐड करे. उससे पहले आइये कुछ चीजों के बारे मे जान लेते है जो आप इस file के अन्दर use करेंगे.




Allow: अगर आप text file के अन्दर किसी चीज़ की allow करते है तो इसका मतलब ये है की आप चाहते है की ये पार्ट search engine मे दिखे
Disallow: अगर आप किसी पोस्ट को disallow कर है तो इसका मतलब है की आप नहीं चाहते ये पार्ट सर्च इंजन मे दिखे
User-agent : इस आप्शन को use कर के आप अपने visitors को अपनी साईट मे जो दिखाना चाहते है वो आप उन्हे दिखा सकते है जैसे की image का source ये file कहा सेव है इत्यादी.
User-agent: Mediapartners-Google : इसके यूज़ से आप adsense code को यूजर से छुपा सकते हो अगर आप इसे disallow करते है तो google adsense आपके site मे ads नहीं दिखा पायेगा इशलिए आप इससे हमेसा allow करे




1.Blogger के settings मे जाके search preferences पे click करे फिर robots.txt पे क्लिक करे फिर edit पे click करे

2. अब आपको नीचे दिये कोड को कॉपी कर के बॉक्स के अन्दर पेस्ट करदेना है और save करदेना है
User-agent: Mediapartners-Google
Disallow:
User-agent:
Disallow: /search
Allow: /
Sitemp:/www.hinivichar597.online





Note: site map की जगह पे अपना site map डाल के setting को सेव कर दे
इस तराह आप अपने blogspot ब्लॉग मे robots.txt file को उसे कर के अपने ब्लॉग के कुछ पोस्ट को हाईड और शो कर सकते है अगर आप blogger यूज़ कर रहे है तो इस फीचर को आप यूज़ ना करे ज्यादा अच्छा होगा और अगर आप wordpress यूज़ कर रहे है तो ये फीचर जरुर यूज़ करे.




Sunday, 5 August 2018

ज़िंदगी में दोस्ती का महत्व ...Friendship Day Special .




दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जिसे हम अपने पसंद और मर्जी के अनुसार चुनते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर एक दोस्त भी जरूरी नहीं होता है...
दोस्ती का कोई तोड़ नहीं होता है.
कुछ दोस्त हमेशा साथ रहते हैं तो कुछ हमेशा के लिए बिछड़ भी जाते हैं और कई बार तो ऐसे दोस्त भी बन जाते हैं जिनका जिंदगी में न होना ही बेहतर रहता है. तभी तो कहते हैं दोस्त जितने कम उनते ही अच्छे और अगर आप उन लोगों में से हैं जो हर किसी से दोस्ती कर लेते हैं तो आपको नीचे दी गई कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि हर एक दोस्त जरूरी नहीं होता है...




1. दोस्ती का एक उसूल है कि इसमें कोई रूल नहीं होता है. इसीलिए तो ये रिश्ता सबसे खास होता है लेकिन अब इस बात का ये भी मतलब नहीं है कि आप हर किसी से दोस्ती कर लें.
2. अपने दोस्त चुनते समय सावधानी रखना भी जरूरी है क्योंकि कई बार दोस्त ही जी का जंजाल भी बन जाते हैं.



3. अगर आपके बचपन के या कॉलेज के कुछ खास दोस्त हैं तो उन्हें खास ही बनाकर रखें ताकि आपकी प्राइवेसी बनी रही है.
4. दोस्त तो कहीं भी बन जाते हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप हर किसी को अपने घर तक ले आएं.



5. दोस्ती करना अच्छी बात है लेकिन इसका ये मतलब बिलकुल नहीं है कि नए दोस्त मिलने पर आप पुराने दोस्तों को भूल जाएं.
6. आजकल सोशल नेटवर्किंग साइट पर भी दोस्ती हो जाना आम बात है लेकिन ऐसी दोस्ती को आगे बढ़ाने से पहले सेफ्टी और सक्योरिटी का ध्यान रखना भी जरूरी है. अक्सर ऐसे रिश्तों में लोग धोख खा जाते हैं.




7. साथ ही दोस्ती के चक्कर में पड़कर अपनी फैमिली और करियर को कभी भी इग्नोर न करें. दोस्त कम हों लेकिन अच्छे और सुलझे हुए होना बहुत जरूरी है.



Sunday, 29 July 2018

30 जुलाई , श्रवण सोमवार का पहला व्रत रखने की विधि

30 जुलाई  , श्रवण  सोमवार का पहला व्रत  रखने की विधि






ज्योतिष के अनुसार आज का व्रत सर्वोत्तम है। आज के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। ज्योतिष के अनुसार श्रावण माह में सोमवार का व्रत रखने और भगवान शिव की अराधना से  सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। परिवार में सुख शांति रहती है। दुर्घटना और अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है। मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर साल सावन के महीने में शिवजी पृथ्वी पर आते हैं। इसलिए इस महीने में शिव की पूजा में भक्त लीन रहते हैं।
कहते हैं कि जब भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान विष पिया तो उसके असर को कम करने के लिए देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया था। यह भी एक अहम वजह है कि सावन में शिव को जल चढ़ाया जाता है। इसलिए ये समय भगवान शिव के भक्तों के लिए अहम माना जाता है।
ऐसे रखें व्रत
इस व्रत को करने से पहले ब्रह्मचर्य नियमों का ध्यान रखें। सुबह उठकर स्नान करें। सुबह इस व्रत में भगवान शिव एवं माता पार्वती का पूजन करें। भगवान शिव को दूध और जल अर्पित करें। हो सके तो रुद्राभिषेक कराएं। सावन के महीने में वैसे शिवलिंग पर  दूध चढ़ाया जाता है। इसके अलावा शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से जीवन में सभी तरह की सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है । भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा के बाद सावन सोमवार व्रत की कथा करें।  भगवान शिव का अभिषेक जल या गंगाजल से होता है।  सोमवार का व्रत दिन के तीसरे पहर तक होता है। दिन-रात में एक समय ही भोजन करें। अभिषेक के समय महामृत्युंजय मंत्र, भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र का जाप कर सकते हैं। नमक रहित प्रसाद ग्रहण करें। आरती के पश्चात भोग लगाएं और परिवार में बांटने के पश्चात स्वयं ग्रहण करें।
इन चीजों से खोलेंगे व्रत तो पूरी होगी हर मनोकामनासावन का महीना 28 जुलाई से शुरू हो गया है। इस बार सावन का पहला सोमवार 30 जुलाई को है। पंचांग के अनुसार इस बार सावन का महीना 30 दिनों का है जिसमें पांच सोमवार शामिल हैं। माना जाता है सावन महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। वैसे ही आप व्रत खोलते समय भी कुछ चीजों का ध्यान रख सकते हैं जिससे भोलेनाथ जल्द खुश हो जाते हैं।आलू
व्रत के दौरान आप आलू का सेवन कर सकते हैं। इसमें मौजूद विटामिन c आपकी त्वचा के लिए अच्छा होता है। आलू शुगर का भी अच्छा स्रोत है। व्रत के दौरान ये आपके शरीर में एनर्जी बनाए रखता है।व्रत खोलते समय आप कटु के आटे में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
फलाहारी थालीपीठ
थालीपीठ एक बहुत ही प्रसिद्ध महाराष्ट्रियन डिश है। इसके लिए आपको साबूदाना ,उबले आलू ,भुनी मूंगफली और सिंघाड़े का आटा चाहिए। आप सिंघाड़े के आटे की जगह कुटु का आटा भी ले सकते है।
समां के चावल
 समां के चावल आमतौर पर व्रत में खाए जाते हैं। यह एक विशेष प्रकार का चावल है। जो की दिखने में सूजी जैसा पर थोड़ा बड़े आकर का होता है। आप इस चावल से खीर ,पूरी ,पुलाव ,समां चावल की खिचड़ी ,चकली और भी बहुत कुछ बना सकते हैं।
अंगूर और खजूर की चटनी
 कुछ खट्टा मीठा खाने का मन हो तो आप अंगूर और खजूर की चटनी भी खा सकते हैं। कुछ परिवार व्रत के दौरान शकरकंद का सेवन भी करते हैं।

Friday, 20 July 2018

ध्यान कैसे करे? यह क्यों जरूरी है?


दोस्तों आज के हिन्दीवाचार ब्लॉग में आपको हम ध्यान यानी Meditation के बारे में पूरी जानकारी बताने जा रहे है , जिसमे आप जानेंगे ध्यान क्या है?  ध्यान कैसे करे? ध्यान हमारे लिए क्यों जरूरी है!

ध्यान कैसे करे

आज की हमारी यह पोस्ट Meditation Techniques in Hindi | ध्यान कैसे करे  आपको ध्यान के बारे में जानकारी देने के लिए ही है इस पोस्ट को हर Age Group को ध्यान में रखकर लिखा गया है .Students  जिनको लगता है उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता इस Mediation Technique के ज़रिये उन्हें पढ़ने में मदद मिलेगी, Concentration बढ़ेगा . Tanagers जिन्हें  लगता है वह decide नहीं कर पाते उन्हें जीवन में क्या करना है , या decision नहीं ले पाते उन्हें भी Meditation Technique से decision making  में help मिलेगीऔर वह age  group जिन्हें जीवन में Peace, self realization  , Self awareness , Live in the Present Moment चाहते है उन्हें भी Meditation Techniques in Hindi इस post से इन सभी aims को पाने में मदद मिलेगी.दोस्तों लेकिन यह सब Result पाने के लिए  आपको  20 मिनट Meditation daily कम से कम २ Months तक करना पड़ेगाहोगा . उसके बाद आपको results दिखने लगेंगे . आप चाहे तो शुरुआत में 10 minutes से Meditation शुरू कर सकते हैं .आदमी को अपनी age के बराबर Meditation एक दिन में  करना चाहिए जैसे अगर आपकी age २० साल है तो आपको 1 दिन में 20 मिनट Meditation करना चाहिए .
Meditation Tips in Hindi

अपनी इस पोस्ट Meditation Techniques in Hindi  में हम cover करेंगे
ध्यान क्या है  What is Meditation?
ध्यान कैसे करे How to Meditate
ध्यान के फायदे Benefits Of Meditation
ध्यान क्या है ( What is Meditation )

ध्यान Meditation है अपनी सोई हुई शक्तियों को जगाना . अपने दिमाग का पूरा इस्तेमाल करना . Science के अनुसार हम अपने दिमाग का मात्रा 2% भाग ही use करते है .
साधारण शब्दो में माना ले हमारे हाथ में कुछ राइ के दाने है हमने उन दानो को ज़मीं पर बिखेर दिया ..अब उन दानो को हमें समेटना है ,इसी तरह हमने अपने दिमाग को कई जगह बिखेर दिया है Meditation वह माध्यम है  जिसके ज़रिये हम अपने दिमाग को जो कई जगह बिखर चूका है उसे उन जगहों से हटाकर उस जगह लगाना जहां हम लगाना चाहते है . वह जगह कुछ भी हो सकती है , कुछ लोग के लिए वह जगह भगवान है , कुछ के लिए बिज़नस , कुछ के लिए पढ़ाई आदि .

spiritual गुरु Osho के अनुसार – ध्यान Meditation  अपने भीतर को साफ करने की प्रकिया  है, ताज़ा और युवा होने का प्रयास है, जीवन को पूरी तरह जीने का प्रयास है । यदि तुम ध्यान से डरते हो तो इसका मतलब है कि तुम जीवन से डरते हो, तुम अवेरे होने से डरते हो, और यदि तुम बिल्कुल प्रतिरोध नहीं करते, तो हो सकता है यह इसलिए है कि तुम ध्यान को गंभीरतापूर्वक नहीं लेते, तुम ध्यान को ईमानदारी से नहीं लेते।”
ध्यान कैसे करे  ( How to Meditate )
शुरुआत में १० मिनट से Meditation शुरू करे .
Meditation करने के कुछ आसान तरीके

1. किसी शांत जगह पर आराम से बैठ जाये कोई सॉफ्ट म्यूजिक चला ले और अपनी सांसो को काउंट करे . शुरुआत में ऐसा १० मिनट करे और धीरे धीरे समय बढाकर २० मिनट करे .

2. आप अपने घर पर किसी दीवार पर कोई पॉइंट बनाकर उसे लगातार १० मिनट तक देखे . यह भी ध्यान का अच्छा तरीका है

3. शुरुआत में ध्यान करने के लिए आपका दिमाग का शांत होना बहुत ज़रूरी है . मन  में क्रोध , जलन होने पर ध्यान पॉसिबल नहीं है

4. हर काम जो भी आप कर रहे है उसे पुरे कंसंट्रेशन से करे. देखते रहे कही आपका दिमाग कुछ और तो नहीं सोचने लगा .

5. सुख आसान में बैठ कर अपने शरीर के हर अंग को तनाव मुक्त करे . और महसूस  करे की आपका मन और शरीर से सब तनाव साँस  के साथ  बहार  निकल रहा  है .और अगर शरीर के किसी भी अंग में दर्द  करता  हो  या कोई बीमारी  हो  तो कल्पना  करे की आपका दर्द  पैरो  के रस्ते  शरीर से बाहर  निकल  रहा  है . ऐसा करने से आपका शरीर धीरे  धीरे  ठीक  होने  लगेगा 
 .
6. वैसे तो आप कभी भी Meditation कर सकते हैं . पर सुबह जल्दी ४-६ बजे तक का समय Meditation  के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है .

Meditation Techinque in Hindi For Beginners

आराम  से बैठकर  1-100 तक count करे . और यह क्रिया  दिन में 2-3 बार  करे. ऐसा  करने  से आपका mind Concentrate होगा.

Meditation Benefits in Hindi ध्यान के फायदे

1. Connected With God

2. Meditation से हम अपने ही Mind को शांत करते है .

3. कहा जाता है इंसान का दिमाग अपार शक्तियों का भंडार है . और Meditation के जरिये आप अपनी सोई हुई शक्तियों को बढ़ा सकते हैं .

4. महान Spiritual GuruOsho के अनुसार अगर आप अपने जीवन को पूर्णता से जीना चाहते हैं तो ध्यान करे .

5. ध्यान से आप तनाव मुक्त जीवन जीते हैं

6. आप अपने काम काम समय में पूरे कर सकते हैं

7. लोगो के नाम , अपनी daily life की ज़रूरत की चीज़े आसानी से यद् रख सकते हैं

8. शरीर ज़्यादा हेल्थी रहता है

9. नींद अच्छी आती है

10. students कम समय में अच्छी पढ़ाई कर पाते हैं .

11. ध्यान से आपका Confidence और concentration दोनों ही बढ़ते हैं.

12. आपको Meditation Techniques in Hindi कैसी लगी हमें Comment के द्वारा ज़रूर बताये| या आपके Meditation , Tension , stress , Depression se related questions ho to aap comments ke dwara hame bhej sakte hain ..ham apki samsyao ka samadhan karne ki koshish karenge . Dhanybad

13. अगर आपको यह Meditation  in Hindi पसंद आयी तो इसे facebook , Google+  पर share करना न भूले!

हमारे सभी हिन्दीविचार ब्लॉग  के पाठको का हम धन्यबाद करते हैं |


Monday, 16 July 2018

जॉब करने से पहले ध्यान देने योग्य बाते





दोस्तों आज के हिन्दीविचार ब्लॉग में आपका स्वागत है आज का हमारा आर्टिकल जरूर पढ़े क्यूंकि इसमें हमने बताया है की कही पर भी जॉब करने से पहले हमे इन बातों का ध्यान रखना चाहिए! 




दोस्तों आज के समय में बढ़ती बेरोजगारी दर और गलाकाट प्रतिस्पर्धा के साथ युवा छात्रों के लिए नौकरी हासिल करना बहुत मुश्किल काम होता जा रहा है. वास्तव में, सही अकादमिक डिग्रियों और वर्क प्रोफाइल होने के बावजूद कई छात्र इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान रिक्रूटर्स को प्रभावित नहीं कर पाते. यदि आप ऐसे ही दुर्भाग्यशालियों में से एक हैं, तो आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप अकेले नहीं हैं.
आजकल, नियोक्ता अकादमिक रिकॉर्ड और डिग्रियों के अलावा कई बातें हैं जो संभावित कर्मचारी में तलाशते हैं. कुछ ऐसे गुण होते हैं जो कुछ उम्मीदवारों को इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान दूसरों से अलग बनाते हैं. इस विषय पर कई सलाहकारों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों से परामर्श करने के बाद हमने गुणों की सामान्य सूची तैयार की है जिसे नौकरी की तलाश कर रहे प्रत्येक 20 वर्षीय को अपने व्यक्तित्व के हिस्से के तौर पर विकसित करने की कोशिश करनी चाहिए. ये गुण आपको न सिर्फ इंटरव्यू पैनल को प्रभावित करने और नौकरी हासिल करने में मदद करेंगे बल्कि ये आपको आपके पेशेवर करिअर में आगे बढ़ने में भी मदद करेंगे.

नेतृत्व (leadership)




हम बेहद प्रतिस्पर्धी दुनिया में रहते हैं जहां नेतृत्व करना कुछ ऐसा है जिसे अच्छे कर्मचारियों की प्राथमिक आवश्यक गुणवत्ता माना जाता है. आजकल नियोक्ता ऐसे लोगों की तलाश में होते हैं जो नेताओं जैसा काम कर सकें और संगठन के लक्ष्यों को पूरा करने वाली पेशेवरों की टीम का नेतृत्व कर सकें. बतौर कामकाजी पेशेवर आपमें नेतृत्व के गुण और अपने सहयोगियों को प्रेरित करने का गुण होना ही चाहिए. साथ ही आपकी टीम में बाधाओं को दूर करते हुए अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता भी होनी चाहिए.  लेकिन पेशेवर माहौल में, सिर्फ नेतृत्व करना ही काफी नहीं होगा क्योंकि आपको योजना भी बनानी होगी, उसकी कल्पना करनी होगी और अवधारणाओं को विकसित भी करना होगा. ऐसी परिस्थितियों में, अच्छा नेता बनने के लिए तुरंत फैसला करना और स्थिर मानसिक धैर्य की भी आवश्यकता होगी.


जिम्मेदारी (Responsblity)


करिअर बनाने के क्रम में एक और बेहद महत्वपूर्ण गुणवत्ता जिसे आपको जरूर सीखना होगा, वह है गंभीरता से अपने काम की जिम्मेदारी लेना. एक नियोक्ता अपने उत्पाद या सेवा के लिए आपको काम पर रखता है और आप कितनी गंभीरता से अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हैं और पूरा करते हैं, इस बात पर ही पूरी कंपनी की सफलता निर्भर करती है. आपको पेशेवर जिम्मेदारियों के तौर पर आपको सौंपी गई जिम्मेदारियों को पूरा करना होगा. वास्तव में, कई अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि जिम्मेदारी लेने वाले कर्मचारियों और उनकी तरक्की की संभावनाओं के बीच सीधा संबंध है. इसलिए, यह गुण न सिर्फ एक नौकरी हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि आगे चलकर शानदार करिअर बनाने के लिए भी जरूरी है.





अनुशासन (Dicipline)


सामान्यतया कहें तो, अनुशासन वह गुण है जिसका पालन करने के लिए हमें स्कूल के दिनों से ही कहा जाता रहा है. हालांकि यह चलन से बाहर हो चुके मुहावरे जैसा लग सकता है लेकिन यह सच है कि अनुशासन आपके पेशेवर सफलता को निर्धारित करने वाला अक्षम्य गुणवत्ता है. एक संगठन के कर्मचारी के तौर पर, यदि आप अपने पेशेवर महत्वाकांक्षाओं को पूरा करना चाहते हैं तो, देर से आने, बहाने बनाने और आम तौर पर आलसी बने रहने की आजादी नहीं होगी. आपके पेशेवर जीवन में, आपको न सिर्फ समय प्रबंधन एवं लक्ष्यों को पूरा करने बल्कि सामान्य आचरण में भी अनुशासन दिखाना होगा. समय पर ऑफिस पहुंचना हो या कार्यक्रमों की योजना बनाना या आपके प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन तय करना, अनुसासन आपके कामकाजी जीवन में आपको सही स्थान पर बनाए रखेगा.




कम्यूटर तकनीक का ज्ञान 

हम जिस तकनीक की समझ रखने वाले विश्व में रहते हैं वहां अलग– अलग तकनीकों पर काम करने की जरूरत होती है. बीते दशक के प्रौद्योगिकी क्रांति का संगठनों के काम करने के तरीके पर बहुत प्रभाव पड़ा है. तकनीक और पेशेवर जीनव के इस एकीकरण के सीधे प्रभाव का अर्थ है कि बतौर कर्मचारी आपसे इस बात की उम्मीद की जाएगी कि अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए आप इन तकनीकों का उपयोग करें और अपनाएं. इसलिए आपको नई तकनीकों को सीखना और अपनाना होगा. उदाहरण के लिए, MS Word सबसे आम टेक्स्ट एडिटर है जिसका उपयोग ज्यादातर संगठन डॉक्यूमेंट्स बनाने के लिए करते हैं. इसी तरह प्रेजेंटेशन बनाने के लिए PowerPoint और स्प्रेडशीट्स बनाने के लिए Excel का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसी आम तकनीकों पर काम करना सीखना आपके रेज्यूमे में वैल्यू एड करेंगे और इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान आपको दूसरों से अलग बनाएंगे.

हम बेहद प्रतिस्पर्धी दुनिया में रहते हैं जहां नेतृत्व करना कुछ ऐसा है जिसे अच्छे कर्मचारियों की प्राथमिक आवश्यक गुणवत्ता माना जाता है. आजकल नियोक्ता ऐसे लोगों की तलाश में होते हैं जो नेताओं जैसा काम कर सकें और संगठन के लक्ष्यों को पूरा करने वाली पेशेवरों की टीम का नेतृत्व कर सकें. बतौर कामकाजी पेशेवर आपमें नेतृत्व के गुण और अपने सहयोगियों को प्रेरित करने का गुण होना ही चाहिए. साथ ही आपकी टीम में बाधाओं को दूर करते हुए अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता भी होनी चाहिए, लेकिन पेशेवर माहौल में, सिर्फ नेतृत्व करना ही काफी नहीं होगा क्योंकि आपको योजना भी बनानी होगी, उसकी कल्पना करनी होगी और अवधारणाओं को विकसित भी करना होगा. ऐसी परिस्थितियों में, अच्छा नेता बनने के लिए तुरंत फैसला करना और स्थिर मानसिक धैर्य की भी आवश्यकता होगी.




संचार (Communication)

हम एक दूसरे से संबद्ध दुनिया में रहते हैं और यहां संचार सफलता की कुंजी है.अलग– अलग माध्यमों से तुरंत और स्पष्ट रूप से संवाद करने की क्षमता किसी भी उम्मीदवार के पेशेवर सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. पेशेवर कामकाज हो या संगठन के तौर पर आपको मौखित और लिखित संचार कौशलों का प्रयोग करना होगा. यह ई–मेल, आधिकारिक चिट्ठियों, बैठकों, सम्मेलनों और कार्यशालाओं के रूप में हो सकता है. वास्तव में, जब आपके कामकाजी जीवन  बात आती है तो आपका संचार कौशल आपके कुल बॉडी लैंग्वेज के 80% हिस्से को प्रभावित करेगा. इसलिए, रोजगार के अवसरों की तलाश में जुटे प्रत्येक छात्र और युवा पेशेवरों को खुद में इन कौशलों को विकसित करने की जरूरत है.




तो, यह अब आपके पास है. यदि आप एक फ्रेशर (नवसिखुआ) हैं जो नौकरी की तलाश कर रहा है या आने वाले समय में नौकरी की तलाश करेगा, तो, आपको अपने व्यक्तित्व में इन गुणों को विकसित करने की कोशिश जरूर करनी चाहिए. यदि आप एक युवा कामकाजी पेशेवर भी हैं, तब भी, ये गुण आपको करिअर में आगे बढ़ने और प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ने में मदद करेंगें.

यदि आपको लगता है कि हमारे द्वारा उपर सूचिबद्ध किए गए गुणों के अलावा भी कुछ ऐसे गुण हैं जो छात्रों और फ्रेशर्स को नौकरी हासिल करने में मदद कर सकते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट्स सेक्शन में उसका उल्लेख करें.






Thursday, 12 July 2018

कैसे किसी अनजान व्यक्ति का दिल जीते?






नमस्कार दोस्तों कैसे है आप? मुझे पता है आप सभी बहुत अच्छे और खुश ही होंगे दोस्तों आज के हिन्दीविचार ब्लॉग में आपके लिए बहुत ही अच्छे विचार बताने जा रहा हूँ! 

आप सभी को पता होगा ही की हम दिन भर में कितने ही लोगों से मिलते है जिसमे से कुछ तो हमें जानते है लेकिन कुछ नहीं जानते है! 





अब सवाल यह उठता है की वह लोग हमे क्यों नहीं जानते है इसका सीधा उत्तर है की हम उन लोगों से मिले नहीं और मिले भी है  तो उनसे अच्छे से तालमेल नहीं बना पाए मतलब उनसे अच्छे से बात नहीं कर पाए है! 

यूँ कहे की उनका हमने अच्छे दिल नहीं जीता है तो दोस्तों आज की पोस्ट में आपको यही बताने वाला हूँ की आप कैसे किसी अनजान व्यक्ति का दिल जीत सकते है? 

वैसे तो किसी अनजान व्यक्ति का दिल जीतना कोई आम बात नहीं है हाँ लेकिन प्रयास करने से यह संभव है! आप भी कर सकते है! वो कैसे होता है  इसके लिए हमारी post को last तक पढ़े! k




यदि आपको वाकई में किसी का दिल जीतना है तो सबसे पहले अपने अंदर कुछ बदलाव लाने होंगे जिससे आपके अंदर सकारात्मक सोच जाग्रत होगी जिससे आपके मन में दूसरों के प्रति सकारात्मक भाव और ख्याल अपने मन में आएंगे! 

दोस्तों सबसे पहले अपने आप को बदल ने के लिए इन प्रमुख बातों का ध्यान रखे! और इन बातों को अपनी जीवन शैली का प्रमुख हिस्सा बना ले! 

दोस्तों आपको कुछ ऐसा बनना पडेगा जिससे लोग आपको पसंद करने लग जाए , आपके अंदर वो काबिलियत जरूर होना चाहिए जिससे हमारी पहचान बढे तो दोस्तों आप कुछ ऐसा work करो जिससे दुनिया वाले आपके fans बन जाए! 




में आपको कोई  actor नहीं बना रहा हूँ में तो आपको hero बनाने की बोल रहा हूँ वो भी आपके फिल्ड के लोगों के लिए मतलब यह की आप जिस कम्पनी में या कही भी काम कर रहे!  

सबसे पहले तो आपका दूसरों के प्रति व्यवहार ही आपको हीरो बनाएगा जब आपको सबलोग अच्छे से जानते होंगे तो जाहिर है नए आने वाले अनजान व्यक्ति भी आपके व्यवहार द्वारा बहुत ही जल्द से दोस्ती का लेगा! 




दोस्तों मेरा एक दोस्त है जो किसी भी अनजान व्यक्ति से बात करने में ही सामने वाले व्यक्ति का दिल जीत लेता है मतलब उस के अंदर ऐसी काबिलियत है जिसके द्वारा वह किसी भी व्यक्ति के अंदर पहली बार में उसके प्रति ऐसी छाप छोड़ देता है जो उसे कभी बुला ही नहीं पाते है तो दोस्तों आप अंदर भी वह काबिलीयत या यूँ कहे वह टेलेंट जरूर होना चाहिए! 




*Is kavita ko sabhi groups me send karen please...*

*☝एक बार इस कविता को*
*💘दिल से पढ़िये*
*😋शब्द शब्द में गहराई है...*

*⛺जब आंख खुली तो अम्‍मा की*
*⛺गोदी का एक सहारा था*
*⛺उसका नन्‍हा सा आंचल मुझको*
*⛺भूमण्‍डल से प्‍यारा था*

*🌹उसके चेहरे की झलक देख*
*🌹चेहरा फूलों सा खिलता था*
*🌹उसके स्‍तन की एक बूंद से*
*🌹मुझको जीवन मिलता था*

*👄हाथों से बालों को नोंचा*
*👄पैरों से खूब प्रहार किया*
*👄फिर भी उस मां ने पुचकारा*
*👄हमको जी भर के प्‍यार किया*

*🌹मैं उसका राजा बेटा था*
*🌹वो आंख का तारा कहती थी*
*🌹मैं बनूं बुढापे में उसका*
*🌹बस एक सहारा कहती थी*

*🌂उंगली को पकड. चलाया था*
*🌂पढने विद्यालय भेजा था*
*🌂मेरी नादानी को भी निज*
*🌂अन्‍तर में सदा सहेजा था*

*🌹मेरे सारे प्रश्‍नों का वो*
*🌹फौरन जवाब बन जाती थी*
*🌹मेरी राहों के कांटे चुन*
*🌹वो खुद गुलाब बन जाती थी*

*👓मैं बडा हुआ तो कॉलेज से*
*👓इक रोग प्‍यार का ले आया*
*👓जिस दिल में मां की मूरत थी*
*👓वो रामकली को दे आया*

*🌹शादी की पति से बाप बना*
*🌹अपने रिश्‍तों में झूल गया*
*🌹अब करवाचौथ मनाता हूं*
*🌹मां की ममता को भूल गया*

*☝हम भूल गये उसकी ममता*
*☝मेरे जीवन की थाती थी*
*☝हम भूल गये अपना जीवन*
*☝वो अमृत वाली छाती थी*

*🌹हम भूल गये वो खुद भूखी*
*🌹रह करके हमें खिलाती थी*
*🌹हमको सूखा बिस्‍तर देकर*
*🌹खुद गीले में सो जाती थी*

*💻हम भूल गये उसने ही*
*💻होठों को भाषा सिखलायी थी*
*💻मेरी नीदों के लिए रात भर*
*💻उसने लोरी गायी थी*

*🌹हम भूल गये हर गलती पर*
*🌹उसने डांटा समझाया था*
*🌹बच जाउं बुरी नजर से*
*🌹काला टीका सदा लगाया था*

*🏯हम बडे हुए तो ममता वाले*
*🏯सारे बन्‍धन तोड. आए*
*🏯बंगले में कुत्‍ते पाल लिए*
*🏯मां को वृद्धाश्रम छोड आए*

*🌹उसके सपनों का महल गिरा कर*
*🌹कंकर-कंकर बीन लिए*
*🌹खुदग़र्जी में उसके सुहाग के*
*🌹आभूषण तक छीन लिए*

*👑हम मां को घर के बंटवारे की*
*👑अभिलाषा तक ले आए*
*👑उसको पावन मंदिर से*
*👑गाली की भाषा तक ले आए*

*🌹मां की ममता को देख मौत भी*
*🌹आगे से हट जाती है*
*🌹गर मां अपमानित होती*
*🌹धरती की छाती फट जाती है*

*💧घर को पूरा जीवन देकर*
*💧बेचारी मां क्‍या पाती है*
*💧रूखा सूखा खा लेती है*
*💧पानी पीकर सो जाती है*

*🌹जो मां जैसी देवी घर के*
*🌹मंदिर में नहीं रख सकते हैं*
*🌹वो लाखों पुण्‍य भले कर लें*
*🌹इंसान नहीं बन सकते हैं*

*✋मां जिसको भी जल दे दे*
*✋वो पौधा संदल बन जाता है*
*✋मां के चरणों को छूकर पानी*
*✋गंगाजल बन जाता है*

*🌹मां के आंचल ने युगों-युगों से*
*🌹भगवानों को पाला है*
*🌹मां के चरणों में जन्‍नत है*
*🌹गिरिजाघर और शिवाला है*


*🌹हर घर में मां की पूजा हो*
*🌹ऐसा संकल्‍प उठाता हूं*
*🌹मैं दुनियां की हर मां के*
*🌹चरणों में ये शीश झुकाता हूं..*

     जितना आप अपनी माँ को प्यार करते हैं उतना शेयर करें

Sunday, 8 July 2018

"आलस्य हमारा शत्रु है इसे दूर कैसे करे"






 नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे हिंदी विचार ब्लॉग में , दोस्तों आज के हिंदी विचार ब्लॉग में आपको बहुत ही इंट्रेस्टिंग जानकारी बताने जा रहा हूँ जो हम सब के लिए बहुत जरूरी है दोस्तों  आप सभी को पता होगा ही की हमें आलश्य आता है तो कही न कही से हमारा नुकशान ही होता है!आज हम जानेगे की-  




  • आलश्य क्या है और इसे कैसे दूर किया जाए? 
  • आलश्य को दूर करना हमारे लिए क्यों जरूरी है?
  • क्या वकाई में आलश्य मनुष्य का शत्रु है? 
  • आदि सवालों के बारे में जानेंगे! 

also read:-  सभी परीक्षाओं में आने वाले GK प्रश्न और उत्तर पढ़े

दोस्तों सबसे पहला हमारा प्रश्न यह है की आलश्य क्या है? दोस्तों आलश्य मनुष्य की गंभीर समस्या का दूसरा नाम है यह मनुष्य पर इस प्रकार से हावी हो जाता है जैसे उसे किसी प्रकार की लत लग गयी हो! 




कुछ लोगों को तो अपना सबसे जरूरी समय तक गवाना पढता है मतलब यदि उन्हें जरूरी काम के बीच आलश्य आ जाय तो वह काम को अधूरा ही छोड़ देते है या फिर पूरे जोश और स्पूर्ति के साथ उस कार्य को नहीं करते है , जिससे उन्हें बहुत जोखिमों का सामना करना पढता है! 

Also read:- my real true love story

जैसे की

मुझे ही देख लो मेने इस ब्लॉग को लिखने की प्लानिंग पूरे तीन घंटे की  , की थी लेकिन हुआ क्या? 


मुझे इस बीच आलश्य , मतलब नींद आ गयी और में सो गया इस तरह यह ब्लॉग लिखने में पूरे तीन घंटे की वजह पूरा एक दिन लगा दिया अब हुआ क्या मेरा तो समय बर्बाद हो गया न!  

दोस्तों ऐसा ही आपके साथ भी होता है    जब भी आप  कोई इम्पोर्टेन्ट काम करने जाते हो! लेकिन उस समय क्या होता? आपको आलश्य आ जाता है और आप सो जाते हो या फिर उस काम को अच्छे से नहीं कर पाते हो! जिसकी वजह से आपको बहुत समस्या का सामना करना पड़ता है! 




Also read:-  अपने पार्टनर से sorry कैसे मांगे जानिए आसान उपाए

इस लिए दोस्तों इस पोस्ट को आप अच्छे से समझते हुए पढ़ना क्यूंकि में आपको इसकी गहराई में लेकर जा रहा हूँ ताकि आपको समझ आ जाए , जो यह हमारा आलश्य है आखिर यह है क्या? 




दोस्तों जहाँ तक मुझे पता है की हमें आलश्य तभी आता है जब हमारे पास अधिक काम होता हो या फिर उस कार्य को करने में हमारी कोई  दिलचस्पी न हो उस कार्य को करने में हमें कोई Intrest न हो उस समय हमे आलश्य का शिकार होना पढता है और हम अपने ऑफिस या कोई और वर्क को अच्छे से नहीं कर पाते है जिससे हमें बहुत नुकशान होता है! 

Also read:- blogging में ध्यान रखने योग्य बाते




कभी कभी तो कुछ लोगो को अपने बॉस के द्वारा डॉट या पनिशमेंट का भी शिकार होना पढता है और यह सब होता है उनके काम की वजह से मतलब वह लोग उस काम को पूरे दिलचस्पी के साथ नहीं कर पाते है! 

दोस्तों आपको एक छोटा साथ उदाहरण बताता हूँ! 

जब हम स्कूल जाते थे तब क्या होता था हमारे साथ पता होगा आपको , हम स्कूल नहीं जाने के बहाने बनाते थे कभी सरदर्द तो कभी पेटदर्द या कुछ और! लेकिन मम्मी के थप्पड़ और पापा के डर से हमें स्कूल जाना ही पड़ता था! ऐसा क्यों होता था क्यूंकि हमे पढ़ाई करने में आलश्य आता है और हमारा पढ़ाई में इतना इंट्रेस्ट भी नहीं होता है इसलिए हम स्कूल नहीं जाने के बहाने बनाते है! 

Also read:- महिला सुरक्षा एक गंभीर विषय





वही इसके दूसरी और या विपरीत देखा जाए तो क्या होगा? 

मेने आपको ऊपर बताया की हम स्कूल नहीं जाते थे क्यूंकि हमारा पढ़ाई में कोई इंट्रेस्ट नहीं था! लेकिन वही इसके विपरीत देखा जाये तो हम दिन भर खेलने-कूदने और सोशल मीडिया फेसबुक , व्हाट्सअप और मोबाइल चलाने में हम कभी बोरिंग फील नहीं होते वल्कि इच्छा होती है की दिन भर फेसबुक और व्हटसअप में लगे रहो क्यूंकि हमें अच्छा लगता है और इन सब में हमारा इंट्रेस्ट है!इसलिए हम टाइमपास करते रहते है न की कोई काम! 

मतलब क्या समझे इस उदहारण का आप की जहाँ पर काम करने में मजा होगा या इंट्रेस्ट होगा वह पर आलश्य नहीं होगा और वही इसके विपरीत जहाँ पर जिस काम को करने में कोई इंट्रेस्ट या मजा नहीं होगा वह पर हमें आलश्य का सामना करना पढ़ेगा , मतलब पूरा काम हमारे इंट्रेस्ट या दिलचस्पी का है!

Also read:-  राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का सपना क्या वाकई में हुआ पूरा

अब यहाँ पे यह दिलचस्पी शब्द को अच्छे से समझ लेना मतलब आलश्य तभी आएगा जब हम कोई काम बिना दिलचस्पी या इंट्रेस्ट के करते है वही किसी काम को इंट्रेस्ट या दिलचस्पी के साथ करेंगे तो क्या होगा वह काम हो जायेगा और आलश्य भी नहीं आएगा! 

दोस्तों हम आलश्य को दूर करने से पहले इसके प्रमुख कारणों के बारे में जान लेते है? 

नींद का पूरा न होना:- जी हाँ दोस्तों हमें सबसे अधिक आलश्य तभी आता है जब हमारी नींद पूरी नहीं हो पाती है मतलब हम अच्छे से सो नहीं पाते है जिसके कारण हमें कोई कार्य करते वक्त बहुत नींद और तनाव महसूस होता है जिससे हम कोई भी काम को अच्छे से नहीं कर पाते है! 




आवश्यकता से अधिक भोजन करना:- आप सभी को पता होगा ही की जब हम अधिक भोजन कर लेते है तो इसके बाद हमें गहरी नीन्द आती है और आलश्य का सामना करना पडता है जिसके कारण हम कोई भी कार्य अच्छे से नहीं कर पाते है! 

कार्य को व्यवस्थित ढंग से नहीं करना:- कार्य कम हो या अधिक इससे फर्क नहीं पडता यदि किसी काम को व्यवस्थित ढंग से नहीं करते है तो इसके कारण भी हमें आलश्य जैसा महसूस होने लगता है और काम के प्रेस्सर से हमे आलस्य आने लगता है! 

कमजोरी या किसी बिमारी का शिकार होना:- जहाँ तक मुझे पता है एक बीमार व्यक्ति को बहुत कामजोरी का सामना करना पड़ता है और जिसके चलते वह कोई कार्य नहीं कर पाता है और आलस्य का शिकार हो जाता है! 

नियमित व्यायाम या ध्यान न करना:- दोस्तों यदि आप अपने शरीर को थोड़ा रेलक्स नहीं करोगे तो इससे आपको आलस्य जैसी बिमारी का सामना करना पड़ सकता है जो आपके लिए बिलकुल सही नहीं है!




दोस्तों मेने आपको आलश्य के प्रमुख पांच कारण बताये है वैसे तो आलश्य आने के अनेको कारण है! 

अब सवाल यह आता है की हम आलश्य को कैसे दूर करे? 

दोस्तों आलश्य को दूर करने के लिए दिलचस्पी का होना अनिवार्य है! 

आलश्य को दूर करने के लिए इन बातों का ध्यान रखे एवं इन बातों को अपने जीवन में आपनाये.

हमेशा अपने मन में कुछ अलग और नया करने की इच्छा रखे! 

हमेशा अपने आपको और अपने दिमाग को तेज और हरदम स्वचलित रखे!




दोस्तों कुछ ऐसा कार्य करे जिसमे आपका इंट्रेस्ट या दिलचस्पी हो! 

यदि आपको कोई ऐसा काम मिला करने के लिए जिसको करने से आपको आलश्य आता है , उस काम को अपने अनुसार अलग करने चाह और इच्छाशक्ति से करने की कोशिश करे!




ऐसा क्यों होता है की कुछ चीजे या काम जो आपको मजबूरी में करने पड़ते है! 

दोस्तों मै ऐसा नहीं कह रहा हूँ की आप यह काम न करे , लेकिन आपको समझना चाहिए की आपके पास वो शक्ति है जिसमे आप दुनियां को कुछ अलग और नया कर के दिखा सकते हो!   

अब यहाँ पे सवाल है की:- 




क्या कुछ नया नहीं है क्या इस दुनिया में कुछ नया करने के लिए कुछ सीखने नया सिखने के लिए!

अगर आपको अपनी लाइफ में कुछ अलग करना है , कुछ इंट्रेस्टिंग बनाना है , तो इस गलतफ़हमी से सबसे पहले बहार आना पड़ेगा!

आप लोगों को सोचना चाहिए की कोई और आपकि लाइफ को इंटरस्टिंग बनाने वाला नहीं है!  

अगर आपकी लाइफ का ठेका आपने किसी और को दे दिया वह कोई भी हो तो समझ जाओ आपकी लाइफ बहुत बोरिंग और बेकार वाली है! 




दोस्तों आपको अपनी लाइफ का ठेका आपको खुद उठाना पड़ेगा , मेरी लाइफ का ठेका मेरे हाथ में है , मुझे समझा है की मुझे क्या करना है और क्या नहीं करना है!