Friday, 15 June 2018

Climbing in hindi , Climbing kya hai in hindi








नमस्कार दोस्तों आज की पोस्ट में हम climbing के बारे में जानेगे , climbing क्या होता है? यह खेल क्यों जरूरी है? इसके फायदे और नुकसान क्या है? 






climbing क्या है?
दोस्तों जैसा की आपको इसके meaning से ही समझ आ रहा होगा की climbing यानी चढ़ना होता है लेकिन यहाँ हम बात कर रहे है खेल की क्यूंकि इस खेल को competition के तौर पर भी खेला जाता है! 
        Climbing चढ़ाई एक खड़ी वस्तु पर चढ़ने के लिए किसी के हाथ, पैर या शरीर के किसी अन्य भाग का उपयोग करने की गतिविधि है। यह मनोरंजक रूप से, प्रतिस्पर्धात्मक रूप से किया जाता है, जो व्यापार पर निर्भर करता है, और आपातकालीन बचाव और सैन्य परिचालन में। यह प्राकृतिक और मानव निर्मित संरचनाओं के अंदर और बाहर किया जाता है! 





दोस्तों यह खेल यानी climbing इंटरनेशनल खेल प्रतिस्पर्धा यानी The International Federation of Sport Climbing या (IFSC) द्वारा होता है! 


Climbing को अलग अलग श्रेणी के अनुसार रखा जाता है ,Climbing कई प्रकार की होती है जैसे Rock Climbing , wall Climbing , Chalk Climbing , Ice Climbing, इत्यादि अनेक प्रकार से हम कर सकते है! इन सब के बारे में आप आगे  जानेंगे? 





Climbing कैसे करते है? 

दोस्तों अब सवाल यह है की हम Climbing कैसे करेंगे मतलब कैसे चढ़ेंगे , तो दोस्तों सब पहले हम Wall quot;helvetica neue" , "helvetica" , "nimbus sans l" , "arial" , "liberation sans" , sans-serif;">Climbing की बात करते है , wall Climbing में  मानव निर्मित दीवार होती है इसमें अलग अलग श्रेणी के हिसाब से वाल बनाई जाती है Climbing wall में अनेक प्रकार के हुक होते है जिन्हे  climbing holds कहते है  इनकी मदद से climbing wall पर सावधानी पूर्वक चढ़ा जाता है!  




Wednesday, 13 June 2018

तू यह नहीं कर सकता? एक प्रेरणादायक कहानी




नमस्कार दोस्तों आज के हिंदी विचार में आपके लिए एक कहानी लेकर आया हूँ जो की बहुत ही उम्दा और प्रेरणादायक है इस कहानी को आप सभी जरूर पढ़े ....धन्यवाद्  

दोस्तों यह कहानी है , दो दोस्तों की , जो एक गांव में रहते थे! जिसमे से एक आठ साल का था , और दूसरा दस साल का , दोनों अच्छे दोस्त थे! बुल्कुल सोले फिल्म के जय और वीरू के जैसे दोनों हमेशा साथ रहा करते थे! साथ-साथ खेलते कूदते , साथ-साथ खाते-पीते और साथ-साथ नाचते गाते!
इन्ही भी पढ़े-  हमारी दोस्ती की असली पहचान क्या है?
                             



फिर एक दिन वह दोनों अपने गांव से खेलते-खेलते दूर निकल जाते है! उनमे से एक दोस्त  (दस साल वाला) , वह अचानक  कुए में गिर जाता है और बहुत जोर से चीखता और चिल्लाता है! क्यूंकि उसे तैरना नहीं आता था! 




अब जो दूसरा दोस्त था मतलब (आठ साल वाल) वह अपने आस-पास में देखता तो उसे कोई नज़र नहीं आ रहा था! ताकि वह बुला सके मदद के लिए! 



तभी उसने नीचे एक बाल्टी और रस्सी देखि , तो उसने ना आव देखा और ताव देखा  और जल्दी से उसने बाल्टी को कुए में  फेक दिया! 




तभी उसका दोस्त वह रस्सी पकड़ लेता है और बाल्टी के सहारे किनारे आ जाता है , लेकिन उसका दोस्त (आठ साल वाला) वह रस्सी पुरी ताकत और जोर के साथ खींचता रहा , खींचता रहा और वह तब खींचता रहा जब तक उसका दोस्त जो की उससे बड़ा था (दस साल का) , उसे वह (आठ साल का) दोस्त उसे तब तक खींचता रहा जब तक की वह उस कुए से बहार न निकल जाता!



 अब यह कहानी यहाँ तक तो ठीक थी , मतलब यह कहानी हमें समज आ रही है , लेकिन वास्तव में  हुआ क्या? वह दोनों  इतने डर गए थे और एक दूसरे को गले लगा का रो रहे थे , क्यूंकि उससे (छोटे वाले दोस्त) ने  अपने (बडे  वाले दोस्त) को कुए से बहार खींच कर बचाया था , वह दोनों आश्चर्य में लींन हो गए थे! 







क्यूंकि जैसे ही यह दोनों दोस्त एक हो गए और एक दूसरे से गले मिल रहे , रो रहे और खुश हो रहे तब उन्हें  एक तरफ से उन्हें डर भी लग रहा था! 



 डर इसलिए था की अब गांव जायेंगे तो बहुत पिटाई होगी मतलब  वह  इस घटना की जानकारी  बताएँगे की कुए गिरने के बाद केसे बचाया तो पता  नहीं क्या होगा? 







लेकिन सब से मज़े की बात तो , यह की वह दोनों अपने  गांव गए और वहा जाकर अपने घर वालों और  गांव के लोगों को बताया तो किसीने उन पर विश्वास ही नहीं किया उन दोनों पर! 



 वह सब लोग अपनी जगहे ठीक थे , क्यूंकि इतने से बच्चे में इतनी ताकत कहाँ से आई की  वह अपने से (बड़े दोस्त को)  खींच ले बहार वो भी कुए में से तो ऐसा सोच कर कोई उन पर विश्वास ही नहीं कर रहे थे! सब लोग सोच रहे थे ऐसा कैसे हो सकता है 







क्यूंकि जो लड़का पानी की भरी बाल्टी बहार नहीं खींच सकता वह इतना वजन कैसे उठा सकता है?  मतलब उन पर कोई भी विश्वास ही नहीं कर रहे थे!



 लेकिन एक आदमी था उस गांव में , जिसने उन दोनों पर विश्वास कर लिया था , उन्हें सब गांव के लोग रहीम चाचा कहते थे , रहीम चाचा सबसे समझदार बुजुर्गों  में से एक थे , और सब को लगा की यार यह  झूठ नहीं बोलते है जरूर सच है इनकी बात में  तभी रहीम चाचा इन पर विश्वास कर रहे तभी सारे गांव वाले इक्कठे होकर रहीम चाचा के पास चले जाते है! 







और जाकर के पूछते है की देखिये हमें तो कुछ समझ आ नहीं रहा आप बताइये  की ऐसा कैसे हो सकता है! 







तभी चाचा को हंसी आ गयी और बोले में क्या बताऊँ बच्चे बता तो रहे है! 



उसने बाल्टी को उठा कर कुए में फेखा और इसने बाल्टी को पकड़ा और अपनी पूरी ताकत से उसे खींच दिया और अपने दोस्त को बचा लिया!







 कुछ देर बार सारे गांव वाले उनकी तरफ देखंने लगे!



 बात यह नहीं  की वह छोटा सा बच्चा कैसे कर पाया यहाँ सवाल यह है की वह यह क्यों कर पाया? उसमे इतनी ताकत कहाँ से आयी? 







बस एक जवाब , सिर्फ एक जवाब  है की- जिस वक्त उस बच्चे ने यह किया मतलब बढे वाले बच्चे को खींचा , उस समय दूर-दूर तक कोई नहीं था उस जगहे पर , बच्चे को यह बताने वाला  की तू यह नहीं कर सकता! कोई नहीं था , कोई नहीं , वह खुद भी नहीं.....संदीप माहेश्वरी 

Saturday, 9 June 2018

श्री ऐ.पी.जे. अब्दुल कलाम जी द्वारा दिए गए १० सफलता के प्रेणादायक विचार ...जरूर पढ़े.!






 नमस्कार दोस्तों हमें सफल लोगों से प्रेरणा अवश्य लेनी चाहिए क्यूंकि इनके द्वारा बताये गए विचार हमारे जीवन को बदल सकते है , हमें जीवन में सफल होने एवं जीने का एक नया रास्ता बताते है! दोस्तों क्या आप भी अपने जीवन में कुछ बदलाव लाना चाहते है? या फिर आपको कुछ समझ नहीं पा रहे है , की क्या करे और क्या नहीं करे! तो दोस्तों आज जो विचार लेकर आया हूँ यह हमारे कलाम साहब द्वारा बताये गए है हमें इनके बताये गए प्रेणनादायक विचारों को जरूर अपने जीवन में अपनाना चाहिए! अब्दुल कलाम हमारे देश के शान और गौरव थे। हमें गर्व है कि हमारे देश में ऐसे महापुरुष का जन्म हुआ। जिसने अपनी पूरी जिंदगी देश के सेवा में लगा दिया। वह एक वैज्ञानिक थे जिन्होंने अपने जीवन काल मे बहुत सी मिसाइलों का अविष्कार किया। इसलिए अब्दुल कलाम जी को भारत का मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता है।
आज अपने इस लेख में हम आपको अब्दुल कलाम की कुछ सुंदर उक्ति के बारे में बताने वाले हैं। जिसे पढ़कर लाखों लोगों की जिंदगी बदल गयी। तो आइए जानते हैं उस सुंदर उक्ति के बारे में जो इस प्रकार हैं।
श्री ऐ. पी. जे. अब्दुल कलाम द्वारा बताये गए  महत्वपूर्ण प्रेरणादायक विचार 

आइये दोस्तों पढ़ते है हमारे कलाम साहब की दस ऐसी बाते जो हमें सफल बनाने में मदद करती है!  




atiitude (रवैया) attitude के बारे में कलाम साहब के विचार कुछ इस प्रकार थे! 
अब्दुल कलाम के सुंदर विचार 


1.अब्दुल कलाम जी के अनुसार जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हर इंसान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है, क्योंकि सफलता का आनंद उठाने कि लिए ये ज़रूरी हैं। क्योंकि जब कोई इंसान मुश्किलों का सामना करता है। तब ही जाकर उसे उसके मायने समझ में आते हैं।
2.अब्दुल कलाम जी कहते हैं कि अपने मिशन में सफल होने का ओनली एक ही जरिया है। किसी भी वर्क को पूरी लगन और निष्ठा से करो।

3. दुनियां का सबसे बड़ा असफलता हिम्मत हारना होता है। इसलिए कभी हिम्मत न हारो और हमेशा आगे बढ़ते रहो।






4. आप अपना कल नहीं बदल सकते, लेकिन अपनी आदतें तो आप बदल सकते हैं, और बदली हुई आदतें ही आपका आने वाला कल बदल देगी।
5. जिंदगी में सफलता के रास्तों को आप खुद चुनों और बिना सोंचे उस पर चल पडो। अगर आप हार जाते हो तो भी निराश मत होना। क्योंकि जो हारता है वही तो जितने का मतलब जानता है। हो सकता हो भगवान आपको उससे भी बेहतर कुछ देना चाहते हों। इसलिए अनवरत प्रयास करते रहिए सफलता आपकी कदम चूमेगी।

6. रास्तें कभी बन्द नहीं होते, अक्सर लोग हिम्मत हार जाते हैं। इसलिए कोशिश आखरी सांस तक करनी चाहिए। मंजिल मिले या तजुर्बा चीजें दोनो ही नायाब हैं।





दोस्तों आप लोगों को अब्दुल कलाम जी की यह बात किसी लगी कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं। अगर आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आयी हो तो ऐसे ही अट्रैक्टिव और रोचक खबरों कि जानकारी के लिए आप हमें वेबसाइट को विजिट जरूर  करें। और ज्यादा से ज्यादा शेयर और लाइक करें। धन्यवाद






Tuesday, 5 June 2018

अंडा शाकाहारी है मांसाहारी?

अंडा शाकाहारी है मांसाहारी?
अंडा शाकाहारी है मांसाहारी? 

नमस्कार दोस्तों हमारे मन में यह सवाल  सालों से है अंडा शाकाहारी है या मांसाहारी और कई बार लोगो के बीच बहस चली आ रही है। जो लोग इसे मांसाहारी मानते हैं उनकी दलील है कि मुर्गी नॉन-वेज है इसलिए उसका अंडा भी नॉन-वेज हुआ। कुछ तो यह भी कहते हैं अंडा से चूजा निकलता है इसलिए यह मांसाहारी है।

 वहीं दूसरी तरफ, जो लोग अंडा को शाकाहारी बताते हैं उनका तर्क यह होता है कि जब गाय से निकला दूध शाकाहारी है, तो फिर मुर्गी से निकला अंडा शाकाहारी क्यों नहीं हो सकता?

 मगर इस विषय पर वैज्ञानिकों की खोज क्या कहती है? ऐसे अंडा देती है मुर्गी जिन लोगों का यह मानना है कि अंडे से चूजा निकलता है इसलिए वह नॉन वेज है, उन लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी अंडा देती कैसे है। 

दरअसल, मुर्गी हर एक-डेढ़ दिन पर अंडे देती है। मगर यह जरूरी नहीं वह अंडा मुर्गे के संपर्क में आने से ही बना हो।ऐसे अंडे शाकाहारी होते हैं बिना मुर्गे के संपर्क के आए, मुर्गी जो अंडे देती है उनसे चूजे नहीं निकलते।


 वैज्ञानिकों की भाषा में इसे अनफर्टिलाइज्ड एग कहते हैं। ये शाकाहारी होते हैं। ऐसे अंडे मांसाहारी होते हैं मुर्गी जो अंडा मुर्गा के संपर्क में आने के बाद देती है, उसे मांसाहारी माना जा सकता है। इन अंडों में गैमीट सेल मौजूद होते हैं जिनसे चूजे निकलते हैं। ये नॉन वेज होते हैं।

   कैसे पहचानें कौन सा अंडा शाकाहारी, कौन मांसाहारी है? बाजार में जो अंडे बिकते हैं, वे फार्म में बनते हैं। किसान वैसे ही अंडे बेचते हैं जिनमें से चूजे नहीं निकल सकते। जिन अंडों से चूजे निकलने की संभावना होती है, वे उसे फार्म में ही रखते हैं ताकि मुर्गा या मुर्गी की संख्या बढ़ सके। 

5 जून विश्व पर्यावरण दिवस एक विशेष लेख






 जैसा की दोस्तों हम सब को पता है की आज पांच जून है और दिन मंगलवार है लेकिन दोस्तों क्या आपको पता है यह  दिन इतना विशेष क्यों है हमारे लिए नहीं पता न यदि पता है तोह आप बिलकुल सही सोच रहे , जी हाँ दोस्तों आज विश्वपर्यावरण दिवस है ...और आज में इस छोटे से लेख में यही बताऊँगा की यह दिन हमारे लिए क्यों इतना स्पेशल है और यह क्यों मनाया जाता है पूरे वर्ल्ड में तो दोस्तों आप तैयार होना मेरे साथ पर्यावरण के बारे में जानने के लिए इसलिए  दोस्तों जरूर पढ़े और मेरे साथ यानी सोनू के साथ बने रहे .. धन्यवाद् 

दोस्तों विश्वपर्यावरण  से जुडी कई ऐसी बाते है जो आज में आपके साथ शेयर कर रहा हूँ , जो सायद आप नहीं जानते होंगे कुछ ऐसे रोचक सवाल जिनके बारे में आपको नहीं पता होगा ,  दस्तों आपको पता होगा की विश्वपर्यावरण दिवस मनाया जरूर जाता है और  आपको इसके लक्ष्य , उद्देश्य के बारे में भी  पता होगा , लेकिन हर साल इसमें क्या होता है , क्या अलग होता है इसके बारे में हम आज बताने वाले है! 

लेकिन कुछ ऐसी खास बाते जो आपको नहीं पता है वहा आज हम इस मौके पर बाताते है! 


5 जून 1974 से मनाया जाता है विश्वपर्यावरण:- 

 दिवस मनाया जा रहा है

भारत में पहला कदम पर्यावरण की ओर:- 

भारत की पूर्व प्रधानमन्त्री श्रीमती इंदिरागाँधी ने साल 1974 की गोष्टी में    इसकी पहल की एवं सभी को जागरूक करने के लिए...सर्वप्रथम पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति एवं उसका विश्व के भविष्य पर प्रभाव' विष्य पर व्याख्यान दिया था 








विश्व पर्यावरण दिवस 2018 पर विशेष क्या है

मीडिया के मुताबिक, हमारा देश, भारत, प्लास्टिक से पर्यावरण संरक्षण के बारे में जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस 2018 का वैश्विक मेजबान (होस्ट) है। इस वर्ष वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे सेलिब्रेशन का थीम हैं '' बीट प्लास्टिक पोल्लुशन" इस अवसर पर पुरे देश के सभी लोग मिलकर प्लास्टिक के इस्तेमाल से होने वाली प्रदूषण के लिए आवाज उठाएंगे।

विश्व पर्यावरण दिवस क्यों मनाया जाता है

बड़े पर्यावरण मुद्दें जैसे भोजन की बरबादी और नुकसान, वनों की कटाई, ग्लोबल वार्मिंग का बढ़ना इत्यादि को बताने के लिये विश्व पर्यावरण दिवस वार्षिक उत्सव को मनाने की शुरुआत की गयी थी। पूरे विश्वभर में अभियान में प्रभाव लाने के लिये वर्ष के खास थीम और नारे के अनुसार हर वर्ष के उत्सव की योजना बनायी जाती है।


प्लास्टिक प्रदूषण क्या है 
दरअसल मुख्य रूप से, कूड़ेदान और असुरक्षित डिस्पोजल के कारण प्लास्टिक प्रदूषण, आजकल की प्रमुख पर्यावरणीय चिंता है. हमें इस चिंता का एहसास होना चाहिए और प्लास्टिक का उपयोग कम करने, पुनः उपयोग करने एवं प्लास्टिक के रीसायकल की प्रक्रिया को अपना कर, प्लास्टिक फेंकने के अपने व्यवहार को बदलने के तरीके के माध्यम से प्लास्टिक का उपयोग कम करने के सामूहिक प्रयास हमें करने चाहिए.
प्लास्टिक के कई मूल्यवान उपयोग हैं, जिसके चलते हम इसका उपयोग करने के लिए निर्भर हो गए हैं. इसके कुछ तथ्य इस प्रकार हैं-




दुनिया भर में, हर मिनिट 1 मिलियन प्लास्टिक की बोतलें खरीदी जाती है. यहाँ तक कि हर साल 500 बिलियन से भी अधिक प्लास्टिक बैग का उपयोग जनता द्वारा किया जाता है.
यदि तुलना की जाए तो पिछले कुछ दशकों में, पहले के मुताबिक अत्यधिक प्लास्टिक थैलियों का उत्पादन किया जाने लगा है. कुल मिलाकर, हमारे द्वारा उपयोग किये जाने वाले प्लास्टिक का 50 प्रतिशत एकल उपयोग है. प्लास्टिक हमारे द्वारा उत्पन्न सभी अपशिष्ट का 10% बनाता है.
प्रतिवर्ष 13 मिलियन टन तक प्लास्टिक डिस्पोजल एवं थैलियों का महासागरों में रिसाव किया जाता है, जिससे समुद्री जीवों को परेशनी होती है. महासागरों में इतनी प्लास्टिक जमा होती है, कि वह एक वर्ष में पृथ्वी को चार बार घेर सकती है.
प्लास्टिक में कई ऐसे रसायन होते हैं, जिनमें से कई विषाक्त या बाधित हार्मोन होते हैं. प्लास्टिक डायओक्सिन, धातुओं और कीटनाशकों सहित अन्य प्रदूषकों के लिए चुंबक के रूप में भी काम कर सकता है.
यदि आप इसका दोबारा उपयोग नहीं कर सकते हैं तो आप इसका उपयोग ही न करें. यहाँ पर कुछ चीजों को बारे में बताया जा रहा है जिससे आप इसका उपयोग करने से बच सकते हैं –
आप अक्सर होटल में प्लास्टिक स्ट्रॉ का उपयोग करते हैं, जोकि इस्तेमाल न करना बेहतर साबित हो सकता है. अपने स्थानीय अधिकारियों को यह नियंत्रित करने के लिए दबाव डालते हुए उन्हें अपने शहर के कचरे का प्रबन्धन कैसे करें ये समझाये.
बाजार जाते वक्त अपने खुद के शॉपिंग बैग लेकर जावें, और खाद्य आपूर्तिकर्ताओं को यह दबाव डालें कि वे नॉन – प्लास्टिक पैकेजिंग का इस्तेमाल करें.




प्लास्टिक कटलरी का उपयोग ना करें, एवं अगली बार जब आप समुद्र तट पर चलने या टहलने के लिए जाते हैं तो वहाँ प्लास्टिक का उपयोग न करें.
इन्हीं सब विषयों को ध्यान में रखते हुए इस साल का विषय “प्लास्टिक प्रदूषण” रखा गया है.

Friday, 1 June 2018

जीवन के पांच सिद्धांत जो बदल देंगे आपकी ज़िंदगी! jeewan badalne wale panch sootra,





   
 नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका आज हम आपको जीवन के पांच वो सूत्र बताने जा रहे है , जिसका आपने  सही से अपने जीवन में अमल किया या अपनाया तथा धारण किया तो हम विश्वास दिलाते है की आप जीवन में जरूर सफल होंगे एवं आपका कल्याण होगा आप जीवन में हमेशा आगे बढ़ेंगे एवं सफलता की और आपके कदम बढ़ेंगे! 
जरूर पढ़िए:-  ज़िंदगी को आसान बनाने के आसान उपाए





यह क्या सूत्र है जरा थोड़ा ध्यान दें और जाने एवं इन पांच सिद्धांतों के बारे में एवं इन सूत्रों का अपने जीवन में जरूर अमल करे:- 





👉पहला सूत्र है शिक्षा:- दोस्तों शिक्षा वो शेरनी का दूध है जिसे बहुत ही सूंदर शब्दों में  डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर ने बताया है , की शिक्षा वो शेरनी का दूध है जो पियेगा वो दहाड़ेगा और जो नहीं पियेगा वो जानवरों की तरह आवाज करेगा! इसलिए याद रखना आप कुछ भी करे , कैसे भी करे , अपने बच्चों को जरूर पढ़ाये और अगर आप अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दे सकते है तो आप याद रखना आप जीवन में कभी भी कोई बड़ा काम नहीं कर सकते है! 




👉दूसरा सूत्र है संस्कार:- दोस्तों चाहे जितनी अच्छी शिक्षा दिला देना अपने बच्चों को , लेकिन बच्चों को संस्कार आप नहीं देंगे तो यह बच्चे आपको बुढ़ापे में कभी साथ नहीं देंगे और न ही सम्मान करेंगे! हम हजारों लाखो को परिवारों को हर रोज देखते है , जिन्होंने अपने बच्चों को बहुत पढ़ाया लिखाया है , और अनेको तरह तरह की डिग्रियां दिला दी है , लेकिन  आज बुढ़ापे में उन्हें सम्मान नहीं मिल पा रहा है , इसलिए हमारा अनुरोध है आप सभी से , की शिक्षा के साथ अपने बच्चों को आप संस्कार भी दें!जरूर पढे:-
 


👉तीसरा सूत्र है संगती:- चाहे जितनी भी अच्छी शिक्षा दिला देना , चाहे जितने भी अच्छे संस्कार दिला देना अपने बच्चों को इससे कुछ नहीं होने वाला है , जब तक आप , अपने बच्चों की संगति पर आप ध्यान देंगे! संगति ऐसी चीज है यदि बुरे लोगों की संगति हो जाये तो वह बुरा इंसान हो जाता है और अच्छे लोगों की संगति करने से वह अच्छा इंसान बन जाता है! यह ध्यान रखना होगा आपको , आपकी शिक्षा , आपके संस्कार तभी आपके काम आएंगे जब बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त हो , और बच्चों की शिक्षा तब प्राप्त होगी जब अच्छी संगति होगी और अच्छी संगति तब होगी जब माँ-बाप की अच्छी संगति होगी! इसलिए ध्यान रखे तीन सूत्र  हमें बताये है पहला शिक्षा , दूसरा संस्कार , तीसरा है संगति अब आपको चौथा बताते है! 




👉चौथा हमारा सूत्र है एकता:- हमने कई बार देखा होगा आजकल घरों की , परिवारों की , गांवों की , शहरों की , देश की एकता बिखंडित हो रही है , लोग जाती के नाम पर , लोग काले और गोर के नाम पर , वर्ग और भेद के नाम पर , ऊँच-नीच के नाम पर और तरह-तरह की जातियों के नाम पर बटते चले जा रहे है! 

याद रखना हमने पशु-पक्षियों में एकता देखी है ,  इसकी मिशाल हम आपको बताना चाहते है! मधुमक्खियों की हमने एकता देखि है , जंगली जानवरों में हमें एकता देखि है!  पांच- साथ सियार इकट्ठे हो जाते है और एक शेर को मार गिराते है , क्यों? क्यूंकि सियारों की एकता होती है! आज हम चाहते  है की , हमारा देश , हामारा समाज , हमारे समाज में रह रहे सभी लोग एकता के साथ रहे , घर परिवार में एकता रहे इसलिए आपको भी एकता को धारण करना पड़ेगा! दोस्तों अब हमने आपको चार सन्देश बता दिए! 




👉पांचवा सूत्र है व्यक्तिगत पहचान:- दोस्तों जिस व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान नहीं होती है वह आदमी किसी काम का नहीं होता है इसलिए आप प्रयास करे की संसार में आपका जन्म हुआ है , यह साढ़े तीन हाथ की काया मिली है , तो आप कुछ ऐसा कार्य करे या करके दिखाए दुनियां को जिससे आपकी पहचान हो , ऐसा कार्य , विशेष कार्य , रचनात्मक कार्य कुछ बहुत अच्छा कार्य करे , कुछ कुशल कर्म करे , जिससे आपकी पहचान बने! संसार के जिस ग्रस्त व्यक्ति ने यह पांच सिद्धांतों का पालन कर लिया तो हम दावे के साथ कहते है की वह व्यक्ति संसार में बहुत आगे निकल जायेगा! हमने आपको पूरे पांच सिद्धांत या सूत्र बताये दोस्तों यदि आप इनका अच्छे से अपने जीवन में अमल करना चाहिए  या अपनाना चाहिए! हमने आपको यह पांच सिद्धांत बतये है की 

पहला शिक्षा 
दूसरा संस्कार 
तीसरा संगति 
चौथा एकता 
पांचवा व्यक्तिगत पहचान  

Wednesday, 30 May 2018

Nipha virus kya hai poori jaankari hindi. जानिये निफा वायरस क्या है इसके क्या लक्षण है और क्या कारन है पूरी जानकारी हिंदी में पढ़े

Nipha virus kya hai poori jaankari hindi. जानिये निफा वायरस क्या है इसके क्या लक्षण है और क्या कारन है पूरी जानकारी हिंदी में पढ़े
Nipha virus की पूरी जानकारी हिंदी में 



Nipha Virus क्या है? 


Nipha Virus के क्या लक्षण है? 


Nipha Virus के क्या कारन है? 


Nipha Virus के क्या उपाय है? 


दोस्तों यह सभी सवाल हमारे मन में है हम इसकी पूरी जानकारी


आपको बताएँगे! 


क्या है Nipha वायरस? केरल के कोझिकोड जिले में निपाह वायरस ने आतंक मचा दिया है! यह एक प्रकार से दिमागी बुखार है ताजा जानकारी के अनुसार इसकी चपेट में आने से अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है! 



वही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एक कमेटी बनायीं है जो बिमारी के तह तक जाने में जुटी हुई है. 



ऐसे में अब सवाल उठ रहे है की आखिर.



Nipha Virus क्या है? 


Nipha Virus के क्या लक्षण है? 


Nipha Virus के क्या कारन है? 


Nipha Virus के क्या उपाय है? 



विश्व स्वास्थ्य संघटन (W.H.O) ने कहा है



👉विश्व स्वास्थ्य संघटन (W.H.O) के अनुसार निपाह वायरस (N.I.V.) एक ऐसा वायरस है ,जो जानवरों से इंसानो में फैलता है! 


👉यह जानवरों और इंसानो में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है!

👉इस वायरस का मुख्य स्रोत fruit bat यानी ऐसे चमगादड़ जो फल खाते है! 

👉ऐसे चमगादड़ों को को Flaying Fox के नाम से भी जाना जाता है! 

कहां से आया ननपाह वायरस ?

👉इस वायरस की सबसे पहिे पहचान 1998 मेंमिेलशया के Kampung Sungai के निपाह  इलाके में हुई थी! उस वक्त वहां ददमागी बुखार  का सक्रंमण था.

👉 यह बीमारी चमगादड़ों से इंसानों और जानवरों तक में फ़ैल  गई. 
3. इस बीमारी की चपेट मेंआने वािे ज्यादातर िोग सअ
ु र पािन केंद्र मेंकाम करते थे. 
4. यह वायरस ऐसे फिों से इंसानों तक पह
ुंच सकता हैजो चमगादड़ों के सपं कक मेंआए हों.
5. यह सक्रं लमत इंसान से स्वस्थ मन

ष्य तक बड़ी आसानी से फैि सकता है.