डर एक आम समस्या



नमस्कार दोस्तों आज आप पढ़ेंगे एक और नया लेख जिसका शीर्षक  " डर " है! डर के बारे में सब को पता है ,  मनुष्य एवं अन्य प्राणियों में यह प्रत्यक्ष रूप से उनके  जीवन में निहित होता है!  क्यूंकि यह स्वाभाविक होता है इसको हम महसूस भी करते है और कभी कभी इसको नहीं भी करते है! कई बार हम इसको महसूस नहीं कर पाते है क्यूंकि यह एक प्रकार से नकारात्मक भावना होती  है , नकारात्मक भावना मतलब ऐसी सोच जो संसार में वषों पहले से व्यप्त है इसे देखा जा सकता है , समझा जा सकता है तथा इसको महसूस किया जा सकता है जिसे पारिवारिक डर , जीवन सम्बंधित डर , भूत प्रेत आदि कितने ही रूप में जाना जाता  है
         जब हमें कोई खतरे की आशंका होती है तब डर की अनुभूति होती है मतलब डर हमारे लिए खतरे की घंटी के जैसे काम करता है डर हमारे विचार , ख्वाब , सपनो को पूरा करने में अड़चने पैदा करता है! लेकिन हमें इसका डट कर सामना करना चाहिए , ऐसा नहीं की बापिस  उससे हार मान कर आना है  , वैसे डर को भी गहराई से समझा जाये तो यह एक नदी में नाव के जैसे काम करता है जो हमें पार लगा सकता है यदि उसका सामना किया जाय तो बस उसे जीतना हमें पड़ता , और दोस्तों एक डर को एक बार जीत गए न तो मनो हम सफल हो गए क्यूंकि डर के आगे जीत है जरूर

            डर से लोग डरते है वह लोग इसे मानते है जबकि  यह एक वहम होता है झूठ होता है काल्पनिक जो हमें हमारी इच्छानुसार कोई भी कार्य करने नहीं देता वह हमें भय रुपी जंजीरों से जकड देता है! (यहां बताया गया  डर का शाब्दिक अर्थ भय होता है) भय रुपी जंजीर जब हमें जकड लेती है तब हमें कुछ समझ नहीं आता है और पहली बार कोई  कार्य करने के लिए जाते है उस समय हमें डर महसूस होता है हम घबरा जाते है , और सोचने लगते है पता नहीं मेरा क्या होगा और साथ में अपने मन में चिंतित होते रहते है और यह सब होता जब हम कोई कार्य करने वाले होते है या कर चुके होते है , अथवा हम उसका इन्तजार कर रहे होते है तब हमारे मन में डर नामक भय उत्पन्न होता है जिसके कारण हमें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है इसकी बजह से हम अपना कोई बड़ा सपना या ख्वाब को पूरा नहीं कर पाते है और उसे अधूरा ही किनारे पर छोड़ना पढता है और हम फिर उस सपने को भूल जाते है इसके बाद आगे बढ़ने की हम कोशिश ही नहीं करते है बस हमेशा के लिए बिल्ली बने रहते है और एक कोने में छुपे रहते है , तो दोस्तों आप समझ रहे न में क्या कहना चाहता हूँ लेकिन अपसोस फिर भी लोग न कुछ सीखते है और न ही समझते है! जरूर पढ़े
            व्यक्ति को  यदि इस डर को काबू में करना आता है तो उसे सफल होने में कोई नहीं रोक सकता क्योंकि उसे पता होता की डर क्या होता है वह उसे नकारात्मक दृस्टि से देखता है! वैसे तो डर के अनेको रूप है लेकिन मौत का डर सबसे बड़ा डर होता है जबकि सब को पता है यह एक दिन आनी ही है क्यूंकि यह जीवन का सत्य है!  एक और डर होता है जो की काल्पनिक होता है वह डर है भूत जिससे सब डरते है इस संसार में भूत नहीं है बस उनकी जगह काल्पनिक कहानियां है जिसका आज के ज़माने में भूत का रूप धारण कर लिया है में नहीं मानता हूँ भूत प्रेत! यह सब झूठ पर आधारित अवधारणाये है

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