जिंदगी में दुःख क्यों आते है? हम दुखी क्यों होते है? क्या कारण है? क्या उपाय है?





                हम दुखी क्यों होते है? दोस्तों आज की पोस्ट बहुत ही आम सवाल पर आधारित है , इस सवाल के बारे में हर एक व्यक्ति जानना चाहता है? आम सवाल का मतलब यह है की ऐसा सवाल जिसके बारे में हम सोच सोच कर अंदर अंदर बहुत दुखी होते है और अपने आप को कोसते रहते है की में ऐसा नहीं करता तो यह नहीं होता , वो नहीं होता आदि सवालों का हमारे मन में ताँता लग जाता है!

         
                  फिर हम उसका उपाय सोचने को मजबूर तो होते है , लेकिन उन सब का कारण नहीं पता कर पाते है! तो दोस्तों आपके साथ भी ऐसा ही होता है तो आप बहुत अच्छे पोस्ट पर आए हो यह पोस्ट आपके लिए ही है आप जरूर पढ़े..धन्यवाद!

                  दोस्तों दुःख और सुख हमारी जिंदगी के या एक सिक्के के दो पहलु चित और पत्त है (यहां चित और पत का मतलब सुख और दुःख को बताया गया है) जो किसी खेल में आरम्भ होने से पहले उछाला जाने वाला , जिसे टॉस कहते है जिसमे से एक न एक तो आने ही क्योंकि यही उस खेल के सिद्धांत है! लेकिन एक टॉस जीतने से हम कोई खेल नहीं जीत पाते है यह मात्र एक सांत्वना होती है उस खेल का आभास कराने के लिए ,उसी प्रकार हमारे सुख और दुःख भी एक खेल के जैसे है जिसमे कोई न कोई तो आना ही है चाहे सुख आये या दुःख क्या फर्क पड़ता है यह जीवन के सिंद्धांत है! इन्हे हमारे जीवने में जरूर उछालने पड़ते है फिर चाहे चित आये या पत् कोई फर्क नहीं पड़ता यह आम बात है!




                   यह बात तो सिद्ध हो चुकी है , की हमारा जीवन किसी खेल से कम नहीं है! इसमें हर कदम पर संघर्ष है! यदि इस खेल को ही हमारे जीवन में apply करे तो यह हमारे जीवन को आसान बना सकता है! हमारे जीवन में सुख दुःख तो आएंगे ही क्यूंकि है यह स्वभाविक है इसका हमें डट कर संघर्ष करना चाहिए!

                   जब हमें दुःख का आभास होता है , तब हम यह सोचने पर मजबूर हो जाते है की हमारी जिंदगी में यह दुःख आखिर आते क्यों है? हमारे जीवन में दुःख इसलिए आते है क्यूंकि यह हमें नए रस्ते बताते है हमें आगे बढ़ाने के लिए यदि हम इन रास्तों में सफल होते है तो हमें सुख की प्राप्ति होती है और यदि हम इन रास्तों से भटक जाते है या असफल होते है तो हमें दुःख की प्राप्ति होती है यही जीवन का सत्य है!




**क्या कारण है दुखी होने का**-
           दोस्तों दुखी होने के कारण दो प्रकार के है एक तो छोटे कारण  और दूसरा बड़े कारण! इन दोनों में फर्क सिर्फ इतना है की छोटे कारण कम  दुःख देते है जबकि बड़े कारण  अधिक दुःख देते  है! अधिक दुःख पहुंचाने वाले कारण इस प्रकार है!

**प्रेम प्रसंग**-
            दोस्तों आप सब को पता होगा ही की आज का दौर केसा चल रहा है इस दौर में नज़ाने कितने आशिक़ स्वयं के पहले प्यार में पागल है या जिनका प्रेम प्रसंग चल रहा है!
           यदि दोस्तों उन दोनों प्रेमियों में कुछ आपसी मदभेद हो जाता है , अपना रिश्ता तोड़ देते है , या फिर किसी को अपना पहला प्यार जिसे वो चाहता है नहीं मिल पता है तो वह बहुत दुखी हो जाता है जिसके कारण वह बहुत टेन्शन में आ जाता है और कोई छोटी से लेकर बड़ी गलतियां कर भेटता है जो उसके जान के लिए भी हानिकारक होता है!




**पारिवारिक शौक**- दोस्तों यह बड़े दुःख की बात है लेकिन फिर भी में बता रहा हूँ! पारिवारिक शौक से हमारे दिल को बहुत गहरी चोट पहुंचती है जिसके द्वारा हम काफी भावुक हो जाते है यह कोई दुःख नहीं होता है वह गम होता है किसीको को हंमसे अलग होने का , यह सब स्वाभविक है क्यूंकि यह परमात्मा की है देंन है यहि सत्य है जीवन का!

 **कर्ज का न चुकापानां**- दोस्तों यह तो आज कल के दौर की आम समस्यां है जिसमे कोई व्यक्ति उधर रूपये पैसे या कुछ और बस्तुए ले तो लेता है लेकिन उसे बापिस लौटने में असमर्थ रह जाता है जिससे व्यक्ति बहुत बहुत तनाव से गुजरने लगता है , वह उस कर्ज को चुकाने की बहुत प्रयास करता है जिसमे बहुत काम लोग ही पैसे दे पाते है , इसमें दोनों सदस्य परेशान होते है तो यह भी प्रमुख कारण है दुखी होने का!

**परीक्षा पास न कर पाना**- ऐसे बहुत ऐ विद्यार्थी होते है , जो अपनी परीक्षा को पास करने के लिए पूरा साल तयारी करते है , कड़ी महेनत करते और पेपर भी देकर आते है , लेकिन किसी कारणवस उनका या तो अच्छे प्रतिशत नहीं बन पाते जितना उन्होंने सोचा था अथवा फैल हो लाते जिसका दुःख उन्हें बहुत सताता है! जिसके वजह से वह अपने देखे हुये सपने टूट जाते है जो उनको बहुत तनाव में डाल देता है!

**दोस्ती-यारी**-दोस्त किसे पसंद नहीं होता है? हमें दोस्त जरूरी भी हो बनाना क्यूंकि यह हमारी हर प्रकार से मदद करने को तत्पर होता है और  जिसमे ऐसे दोस्त बनते है जो जिंदगी भर साथ देने का वादा  करते है! लेकिन किसी वजह से दोसतीं में दरार पड़ जाते है और दोनों बात भी नहीं कर पाते है जो की उन्हें बहुत परेशान कर देता है!

**अन्य समस्या**- दोस्तों यह हमारी लाइफ है और जिंदगी में समया तो बहुत आती है और चली जाती ही बस इसका आपको डट कर सामना करना चाहिए जिसमे पारिवारिक दुःख , कानूनी दुःख , आर्थिक समस्या का दुःख , शादी के बाद पति पत्नी में अनबन का दुख , आदि अनेक ऐसे समस्या है जिसका में बखान भी नहीं कर सकता!





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