जीवन एक बहती "धारा" By-$0nu mewade







  नमस्कार दोस्तों लेकर आया हूँ आज का एक और नया हिंदी विचार , दोस्तों इस विचार को पढ़ते समय आप थोड़ा गहराई से सोचिएगा , की "हमारा जीवन एक बहती धारा "के जैसे है या नहीं? तो दोस्तों बताना चाहूंगा की आपको यह हिंदी ब्लॉग कैसा लगा आप हमें नीचे कमेंट में बता सकते है                 "जीवन एक बहती धारा"



जी हाँ दोस्तों हमारा जीवन भी किसी बहती धारा से कम नहीं है जिसमे कब बाढ़ आ जाये? , कब पानी रुक जाए? , और कब पानी सूख जाए? इसका हमें कोई पता नहीं है! ठीक उसी प्रकार हमारे जीवन में कब दुख आ जाये कब सुख आ जाये या कब क्या हो जाये इसका हमें कोई पता नहीं बस हमें उस धारा के जैसे आगे बढ़ते रहना है! http://www.hindivichar597.online/2018/03/blog-post.html

                जब किसी धारा का उद्द्गम होता है तो वह इतनी खूबसूरत बहते हुए अपना रास्ता बनाती जाती है चट्टानों को तोड़ती , कल कल बहती नजाने कितनों की प्यास भुजाति और कितनों को पार लगती , कितनी ही बड़ी समस्या हो वह आगे बढ़ती जाती!





                दोस्तों यदि आप इस जीवन को एक छोटी सी धारा के रूप में समझोगे तो शायद आपको समज में आ जायगा क्यूंकि जब हमारा बचपन होता है तब हम उस धारा के सामान होते है जो कल कल की आवाज करते बहुत खुबसुरती से बहती जाती है उसी प्रकार हम को भी उस धारा के सामान मुश्किलों का सामना करना है चाहे हमारी ज़िंदगी में कितनी भी समस्यां क्यों न हो बस हमें कर्म करते जाना है!
   
               जब यह धारा अपना पथ बनाते हुए गुजरती है तो उसमे और नदी , नालों का गंधा पानी भी समाहित कर लेती है क्यूंकि उससे आगे बढ़ना है और रास्ता बनाना है उस्समे जितना पानी मिलेगा जैसा पानी मिलेगा वह अपने में समाहित करती है और बहती जाती है और एक दिन आता है जब वही छोटी सी धारा एक विशाल नदी का रूप धारण कर चुकी होती है फिर वह एक नदी बन जाती है!





         तो दोस्तों ऐसा ही कुछ मोड़ आता है हमारी ज़िंदगी में इसलिए ही सब लोग कहते है की कर्म करो परन्तु फल की चिंता मत करो! आप कर्म करो लेकिन सकारात्मक भाव से करो जैसे उस धारा के सामान वह अपने में अच्छा पानी-नदी तालाब! और गंधा पानी नाले का पानी अपने में मिलाती तभी तो वह नदी बन के उफान आती है , ठीक इसी प्रकार हम भी यदि कर्म करने की भावना को सकारात्मक रूप से अपनी ज़िंदगी में apply करेंगे तो एक दिन आएगा जब सफलता हमारे हाथ में होगी इस हिंदी विचार का मूलमन्त्र यही जीवन प्रवाह!पशु-पक्षी हमारे दोस्त है! हमें इनकी मदद करनी चाहिए!
 
              अब वह धारा जब नदी का रूप धारण कर लेती है फिर भी वह बहना बंद नहीं करती बस वो अपना कर्म करती जाती और आगे बढ़ती और छोटी बड़ी नदी को और अपने में समाहित करती है उसे स्वयं यह पता नहीं होता है की मुझे जाना कहाँ है जब की वह ऐसा रास्ता तय करने में जो उसमे समाहित छोटे बड़े नदी तालाब का पानी होता है जो उससे इतना बड़ा बना देता है की अब वह अंत में समुन्द्र में जाकर मिलती है!
 
          इसलिए आपको अपने साथ छोटो का भी ध्यान रखना है और उनको भी अपने पथ पर आगे बढ़ाना है तभी यह संसार को पार कर पाएंगे और उन्हें हमेशा सकारत्मक कर्म करने की प्रेणना दे ...धन्यवाद में सोनू अब आपसे विदा लेता हूँ फिर मिलेंगे  एक और नए हिंदी विचार के साथ ..तब तक आप खुश रहे और दुसरों को भी खुश रखे !पहले अपनी सोच बदलो दोस्तों संसार तो अपने आप बदल जायेगा 

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