पुरानी हवेली {रहस्यमय हिंदी रोचक कहानी)





 श्याम का समय , एक बड़ी पुरानी  हवेली , सूर्य अभी अभी पश्चिम दिशा की और डूब गया था और आकाश में उसके अस्त होने के निशान नज़र आ रहे थे!
हवेली के सामने थोड़ा खाली मैदान था , और उस खाली मैदान के आगे बहुत सारे पेड़ लगे हुए थे! हवा भी बहुत तेज रफ़्तार से बह रही थी! वह पर लगे पेड़ भी बहुत तेज हिल रहे थे! हवेली के पास ही एक कुआं  था , उस कुए के आसपास भी बहुत बड़ी घास और पेड़ लगे हुए थे , ऐसा लग रहा था की वह कुआ सालों से किसी ने उपयोग नहीं किया होगा ! उस हवेली से कुछ दूर देखने पर एक छोटा सी बस्ती दिखाई दे रही थी! उस बस्ती के लोग उस हवेली की और नहीं जाते थे!


   तभी , उस बस्ती का एक लड़का बिक्की , उम्र यही कुछ सात आठ साल , थोड़ा सावला लेकिन दिखने में बहुत आकर्षक वह उस गांव से अपने बछड़े को घास  खिलाने के लिए उस हवेली की तरफ आया था! उस बछड़े का भी उस लड़के से बहुत लगाव दिख रहा था! बिक्की उसे छोड़ते ही वह उछल कूद करने लगता फिर बिक्की उसे पकड़ने के लिए दौड़ता! दौड़ते खेलते कूदते बछड़ा उस हवेली के परिसर में घुस जाता  है , अब बिक्की भी वह हवेली में आ जाता है! उस हवेली में घुसते ही बिक्की के शरीर में एक घबराहट दौड़ गयी , क्यूंकि उसे इस हवेली में जाने के लिए घर वालों ने मना किया था! लेकिन फिर भी उसे जाना पड़ा रहा था  , क्यूंकि उसका बछड़ा हवेली के अंदर चला गया था! 

वह उस बछड़े की और देखते ही  जोरो से चिल्लाते हुए बोला! 'मुन्ना' रुको , कहाँ जा रहे हो! 

उसके घर वाले बछड़े को प्यार से "मुन्ना" नाम से पुकारते थे! 

लेकिन तब तक  बछड़ा उस हवेली के परिसर में घुस कर , सामने खाली मैदान लाँघ कर हवेली के पास वाले कुए की ओर दौड़ने लगा! 

"मुन्ना उधर मत जाओ"      "बिक्की फिर से चिल्लाया! 

लेकिन वह बछड़ा उसकि एक भी बात  सुनने को तैयार नहीं था.

वह बछड़ा दौड़ते हुए जाकर उस कुए के  पास जो पत्थर का ढेर था उस पर चढ़ गया! 




अब बिक्की को उस बछड़े की चिंता होने लगी थी , क्यूंकि उसने बस्ती में उस कुए के बारे में तरह-तरह की भयानक कहानियां सुनी थी! उसने सुना था की उस कुए से  कोई भी प्राणी अबतक लौट कर नहीं आया था. और जो भी कोई उन्हें लेने गया वो भी नहीं आये थे ! इसीलिए शायद उस बस्ती के   लोग उस कुए को पुराने कुए के नाम से पुकारते थे! बिक्की अब रुक गया और उसे लग रहा था की उसके पीछे दौड़ने से बछड़ा आगे दौड़ रहा हो ,  और वह ऐसा ही दौड़ता रहा तो आगे उस कुए में जरूर गिर जायेगा! 


बिक्की भले ही रुक गया लेकिन वह बछड़ा उस कुए के पास पत्थरों डेर  पर चढ़ चूका था फिर वह उस पुराने कुए के इर्दगिर्द घूमने लगा! 


बिक्की क्या किया जाए उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था! उसने वही रुके हुए अपने आसपास नज़रे  दोड़ाई. उस हवेली की ऊँची ऊँची पुरानी दीवारे और उसके आसपास लगे घने पेड़ , उसे डर लगने लगा था! 

अब तक उस हवेली के बारे में और उस पुराने कुए के बारे में उसने सिर्फ सुन रखा था. लेकिन आज पहली बार वह उस इलाके में आया था! 

बस्ती वालों के कहे के अनुसार सचमुच वह पर डरावना माहौल था , बल्कि लोगों के कहने से भी अधिक वह डरावना लग रहा था , वह अपने प्यारे बछड़े को अकेला  छोड़ कर भी नहीं जा सकता था अब धीरे-धीरे चलते चलते बिक्की उस कुए के पास जाकर पहुंचा.  बिक्की उस कुए के एक छोर पर था , तो वह बछड़ा दूसरे छोर पर अब भी वह उस पत्थरों के ढेर पर चढ़ रहा था , इतने में उसने देखा की  उस पत्थरों के ढेर पर चलते हुए बछड़े के पैर के नीचे से एक पत्थर फिसल गया और ढुलकते हुए कुए में जा  गिरा! 




तभी    'मुन्ना'...... 'बिक्की'  फिर से चिल्लाया! 


इतना बडा पत्थर गिरने के बाद भी उस कुए से कोई आवाज नहीं आई थी ,  बिक्की ने कुए के किनारे  खड़े होकर कुए में झांककर देखा , नीचे कुए में कुछ दूर तक कुए की दीवार नज़र आ रही थी! लेकिन उसके नीचे ना दीवार , न पानी और न कुए का तल , सिर्फ काला काला कभी ख़त्म न होने वाला अंधकार.  शायद यही एक कारण था की उस कुए को सब लोग पुराने कुए के नाम जानते थे! 

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