5 जून विश्व पर्यावरण दिवस एक विशेष लेख






 जैसा की दोस्तों हम सब को पता है की आज पांच जून है और दिन मंगलवार है लेकिन दोस्तों क्या आपको पता है यह  दिन इतना विशेष क्यों है हमारे लिए नहीं पता न यदि पता है तोह आप बिलकुल सही सोच रहे , जी हाँ दोस्तों आज विश्वपर्यावरण दिवस है ...और आज में इस छोटे से लेख में यही बताऊँगा की यह दिन हमारे लिए क्यों इतना स्पेशल है और यह क्यों मनाया जाता है पूरे वर्ल्ड में तो दोस्तों आप तैयार होना मेरे साथ पर्यावरण के बारे में जानने के लिए इसलिए  दोस्तों जरूर पढ़े और मेरे साथ यानी सोनू के साथ बने रहे .. धन्यवाद् 

दोस्तों विश्वपर्यावरण  से जुडी कई ऐसी बाते है जो आज में आपके साथ शेयर कर रहा हूँ , जो सायद आप नहीं जानते होंगे कुछ ऐसे रोचक सवाल जिनके बारे में आपको नहीं पता होगा ,  दस्तों आपको पता होगा की विश्वपर्यावरण दिवस मनाया जरूर जाता है और  आपको इसके लक्ष्य , उद्देश्य के बारे में भी  पता होगा , लेकिन हर साल इसमें क्या होता है , क्या अलग होता है इसके बारे में हम आज बताने वाले है! 

लेकिन कुछ ऐसी खास बाते जो आपको नहीं पता है वहा आज हम इस मौके पर बाताते है! 


5 जून 1974 से मनाया जाता है विश्वपर्यावरण:- 

 दिवस मनाया जा रहा है

भारत में पहला कदम पर्यावरण की ओर:- 

भारत की पूर्व प्रधानमन्त्री श्रीमती इंदिरागाँधी ने साल 1974 की गोष्टी में    इसकी पहल की एवं सभी को जागरूक करने के लिए...सर्वप्रथम पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति एवं उसका विश्व के भविष्य पर प्रभाव' विष्य पर व्याख्यान दिया था 








विश्व पर्यावरण दिवस 2018 पर विशेष क्या है

मीडिया के मुताबिक, हमारा देश, भारत, प्लास्टिक से पर्यावरण संरक्षण के बारे में जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस 2018 का वैश्विक मेजबान (होस्ट) है। इस वर्ष वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे सेलिब्रेशन का थीम हैं '' बीट प्लास्टिक पोल्लुशन" इस अवसर पर पुरे देश के सभी लोग मिलकर प्लास्टिक के इस्तेमाल से होने वाली प्रदूषण के लिए आवाज उठाएंगे।

विश्व पर्यावरण दिवस क्यों मनाया जाता है

बड़े पर्यावरण मुद्दें जैसे भोजन की बरबादी और नुकसान, वनों की कटाई, ग्लोबल वार्मिंग का बढ़ना इत्यादि को बताने के लिये विश्व पर्यावरण दिवस वार्षिक उत्सव को मनाने की शुरुआत की गयी थी। पूरे विश्वभर में अभियान में प्रभाव लाने के लिये वर्ष के खास थीम और नारे के अनुसार हर वर्ष के उत्सव की योजना बनायी जाती है।


प्लास्टिक प्रदूषण क्या है 
दरअसल मुख्य रूप से, कूड़ेदान और असुरक्षित डिस्पोजल के कारण प्लास्टिक प्रदूषण, आजकल की प्रमुख पर्यावरणीय चिंता है. हमें इस चिंता का एहसास होना चाहिए और प्लास्टिक का उपयोग कम करने, पुनः उपयोग करने एवं प्लास्टिक के रीसायकल की प्रक्रिया को अपना कर, प्लास्टिक फेंकने के अपने व्यवहार को बदलने के तरीके के माध्यम से प्लास्टिक का उपयोग कम करने के सामूहिक प्रयास हमें करने चाहिए.
प्लास्टिक के कई मूल्यवान उपयोग हैं, जिसके चलते हम इसका उपयोग करने के लिए निर्भर हो गए हैं. इसके कुछ तथ्य इस प्रकार हैं-




दुनिया भर में, हर मिनिट 1 मिलियन प्लास्टिक की बोतलें खरीदी जाती है. यहाँ तक कि हर साल 500 बिलियन से भी अधिक प्लास्टिक बैग का उपयोग जनता द्वारा किया जाता है.
यदि तुलना की जाए तो पिछले कुछ दशकों में, पहले के मुताबिक अत्यधिक प्लास्टिक थैलियों का उत्पादन किया जाने लगा है. कुल मिलाकर, हमारे द्वारा उपयोग किये जाने वाले प्लास्टिक का 50 प्रतिशत एकल उपयोग है. प्लास्टिक हमारे द्वारा उत्पन्न सभी अपशिष्ट का 10% बनाता है.
प्रतिवर्ष 13 मिलियन टन तक प्लास्टिक डिस्पोजल एवं थैलियों का महासागरों में रिसाव किया जाता है, जिससे समुद्री जीवों को परेशनी होती है. महासागरों में इतनी प्लास्टिक जमा होती है, कि वह एक वर्ष में पृथ्वी को चार बार घेर सकती है.
प्लास्टिक में कई ऐसे रसायन होते हैं, जिनमें से कई विषाक्त या बाधित हार्मोन होते हैं. प्लास्टिक डायओक्सिन, धातुओं और कीटनाशकों सहित अन्य प्रदूषकों के लिए चुंबक के रूप में भी काम कर सकता है.
यदि आप इसका दोबारा उपयोग नहीं कर सकते हैं तो आप इसका उपयोग ही न करें. यहाँ पर कुछ चीजों को बारे में बताया जा रहा है जिससे आप इसका उपयोग करने से बच सकते हैं –
आप अक्सर होटल में प्लास्टिक स्ट्रॉ का उपयोग करते हैं, जोकि इस्तेमाल न करना बेहतर साबित हो सकता है. अपने स्थानीय अधिकारियों को यह नियंत्रित करने के लिए दबाव डालते हुए उन्हें अपने शहर के कचरे का प्रबन्धन कैसे करें ये समझाये.
बाजार जाते वक्त अपने खुद के शॉपिंग बैग लेकर जावें, और खाद्य आपूर्तिकर्ताओं को यह दबाव डालें कि वे नॉन – प्लास्टिक पैकेजिंग का इस्तेमाल करें.




प्लास्टिक कटलरी का उपयोग ना करें, एवं अगली बार जब आप समुद्र तट पर चलने या टहलने के लिए जाते हैं तो वहाँ प्लास्टिक का उपयोग न करें.
इन्हीं सब विषयों को ध्यान में रखते हुए इस साल का विषय “प्लास्टिक प्रदूषण” रखा गया है.

Post a Comment

0 Comments