खाली हाथ आये हो , खाली हाथ जाओगे! गीता उपदेश- जो बदल देंगे हमारा जीवन!





नमस्कार मित्रों जय श्रीकृष्ण-राधे-राधे!मनुष्य केवल खुद के कल्याण के बारे में सोचता है, यदि वह समाज हित के बारे में सोचे तो संसार स्वर्ग बन जाए। श्रीमद्भागवत गीता में बताई गई बातें यदि मनुष्य आचरण में उतारे तो वह समाज का कल्याण कर सकता है। पौराणिक विनोद शास्त्री का कहना है कि मनुष्य व्यर्थ ही चिंता करता है। उसे केवल कर्म करना चाहिए। कर्म के अनुरूप ही उसे फल की प्राप्ति होगी

 दोस्तों आज आप पढ़ने वाले है भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बताये गए अर्जुन को गीता उपदेश जिनको पढ़ने के बाद हमारा जीवन बदल जायेगा तो दोस्तों जरूरी पढ़े गीता उपदेश जो बदल देंगे हमारा जीवन! 


हमें गीता के उपदेशों को क्यों पढ़ना चाहिए!

दोस्तों गीता को हिन्दू धर्म में बहुत खास स्थान दिया गया है , गीता अपने अन्दर भगवान् श्रीकृष्ण के उपदेशों को समेटे हुए है , को को आम संस्कृत भाषा में रचा गया है! जो व्यक्ति संस्कृत को समझने की जानकारी रखता है , वह आराम से श्रीमद गीता को पढ़ सकता है! श्रीमद गीता में जीवन के उन चार योगों के बारे में विस्तार से बताया हुआ है जैसे- कर्म योग , भक्ति योग , राजा योग और प्रजा योग! 




भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं कि न तो मैं किसी को सुख देता हूं, और न ही दुख। मनुष्य स्वयं के कर्मों से ही सुख और दुख को प्राप्त करता है।-भागवत गीता उपदेश



हे अर्जुन , तुम यह निश्चयपूर्वक सत्य मानो की मेरे भक्त का कभी भी विनाश या पतन नहीं होता!- भागवत गीता उपदेश



काम , क्रोध और लोभ , यह तीनो व्यक्ति को नरक की ओर ले जाने वाले द्वार होते है , इसलिए इन तीनो का त्याग करना चाहिए- भागवत गीता उपदेश



मै ही सबकी उत्पत्ति का कारण हूँ , और मुझसे ही जगत का होता है!-   भागवत गीता उपदेश



यदि कोई बड़े से बड़ा दुराचारी भी , अनन्य भक्ति भाव से मुझे भजता है तो , उसे भी साधू ही मानना चाहिए , वह शीघ्र ही धर्मात्मा हो जाता है , तथा परम शांति को प्राप्त जाता है!   भागवत गीता उपदेश


न यह शरीर तुम्हारा है, न तुम शरीर के हो। यह अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश से मिलकर बना है और इसी में मिल जाएगा। परन्तु आत्मा स्थिर है। फिर तुम क्या हो? - भागवत गीता उपदेश





आत्मा अजर अमर है। जो लोग इस आत्मा को मारने वाला यह मरने वाला मानते हैं वे दोनों की नासमझ हैं। आत्मा न किसी को मारती है और न ही किस के द्वारा मारी जा सकती है।- भागवत गीता उपदेश


आत्मा न कभी जन्म लेती है और न मरती है। शरीर का नाश होने पर भी इसका नाश नहीं होता। - भागवत गीता उपदेश 


तुम अपने आपको भगवान को अर्पित करो। यही सबसे उत्तम सहारा है, जो इसके सहारे को जानता है वह भय, चिन्ता, शोक से सर्वदा मुक्त रहता है।- भागवत गीता उपदेश





जैसे मनुष्य अपने पुराने वस्त्रों को उतारकर दूसरे नए वस्त्रों धारण करता है, वैसे ही जीव मृत्यु के बाद अपने पुराने शरीर को त्यागकर नया शरीर प्राप्त करता है।- भागवत गीता उपदेश




शस्त्र इस आत्मा को काट नहीं सकते, अग्नि इसको जला नहीं सकती। जल इसको गीला नहीं कर सकता। वायु इसे सूखा नहीं कर सकती।- भागवत गीता उपदेश 


जो हुआ , वह अच्छा हुआ , जो रहा , वह अच्छा हो रहा , जो होगा , वह भी अच्छा ही होगा! तुम भूत का पश्च्याताप करो! भविष्य की चिंता न करो! वर्तमान चल रहा है! भागवत गीता उपदेश

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