!! मनहूस ज़िंदगी!! .....!!एक अनसुनी कहानी !!.......By Hindivichar.online

एक छोटा सा घर जिसमे सिर्फ एक कमरा था और उसमे एक साइड चारपाई पडी थी...

एक कोने मे कुछ बर्तन और एक कोने मे टायलेट बना हुआ था।
टायलेट मे दरवाजा और दीवारे सब थी यानि एक आदमी के रहने के लिए बहुत था।


सुबह के 5 बजे का टाइम था...
एक लडका चारपाई पर सो रहा था....
कि तभी घडी पर लगाया हुआ अलार्म बज उठा.....


वो लड़का अलार्म की आवाज सुनकर उठ गया....
फिर उसने अलार्म बंद किया और टॉयलेट में घुस गया...


फिर फ्रेश होकर जोगिंग सूट पहन लिया...
और निकल क्या जोगिंग पे....
15 मिनट बाद वो एक पार्क में पहुंच गया....
वहां कुछ देर जोगिंग करके थोड़ी बहुत दूसरी एक्सरसाइज करने लगा।


कुछ देर बाद उसने एक्सरसाइज की और चल पड़ा गेट की ओर!


वो गेट के पास पहुंचा ही था कि तभी वहां पर तीन लोगों की एंट्री हुई!


उन तीनों को देखकर लड़के के चेहरे पर मुस्कान आ गई।


पर जैसे ही उन तीनों की नजर उस पर पड़ी तीनों ने मुंह फेर लिया और आगे बढ़ गए...
इन मे से एक आदमी था और बाकी दो लड़कियांँ..




पहली लड़कीः- पता नही ये मनहूस कब तक हमें अपनी शक्ल दिखाता रहेगा...


आदमीः- पता नहीं ये अभी तक हमारे जीवन में ग्रहण की तरह क्यों लगा हुआ है....


दूसरी लड़की:- जी करता है इसे यही जान से मार दूं...
आ जाता है सुबह-सुबह मुंह उठाकर...
मनहूस कहीं का...


फिर वो तीनो अपनी जोगिंग करने लग जाते हैं।


इनकी बातें उस लड़के ने भी सुन ली वो लड़का इनकी बाते को सुनकर मुंह लटका के गेट से बाहर चला गया।


ये सब उसके लिए रोज का था...
उसके साथ ही सब कुछ रोज होता था...
वो लड़का घर पहुंच गया था...


और अपनी मां की तस्वीर को पकड़ के उसे देखने लगा.....
उसकी आंखों से आंसू बहने लगे!


लड़का:- मां मुझे क्यों छोड़ के गई....
आखिर क्या गुनाह था मेरा.....
एक तू ही तो थी जो मुझे समझती थी....
क्यों छोड़ के गई मुझे आखिर क्यों...
इस दुनिया में मैं बिल्कुल अकेला हूँ...
मैंने तुम्हें मारा है...
क्या ऐसा कभी हो सकता है कि कभी किसी बेटे ने अपनी मां को मारा हो....
मां मुझे भी अपने साथ ले चल मां....
अब और नहीं सहा जाता ये अकेलापन....


(अब थोड़ा सा परिचय हो जाए....
दीप वर्मा इस कहानी का हीरो यानी कि मै...
लम्बाई5"4'
सामान्य सा शरीर...
सांवला रंग....
पढ़ने में अच्छा हूं...
स्पोर्ट्स में भी अच्छा हूं....
पर मेरा ना तो कोई दोस्त हैं ना ही कोई अपना कहने वाला..


क्योंकि सब मुझसे नफरत करते है...
सभी मुझे मनहूस कहते है...
इसलिए आज तक अकेला हूं...
ऐसा नहीं है कि मेरा कोई परिवार नहीं है...
मेरा भी परिवार है...
पर सभी ने मुझे अलग कर दिया है...
क्योकि वो सब मुझे मेरी मां का कातिल मानते हैं...
क्योंकि मैं मनहूस हूं..
पर हां वो लोग मुझे महीने के महीने कुछ रुपए भेज देते है....


जिससे मेरा गुजारा चल है....
पर इसी के साथ मै एक कॉफी शॉप में भी काम करता हूं...
वहां से भी कुछ पैसे आ जाते है...


कुछ लोग तो मुझसे नफरत करते हैं और कुछ को मैं अपने करीब नहीं आने देता क्योंकि कहीं ना कहीं मैं भी खुद को मनहूस मानता हूं।


यह तो था हीरो का परिचय...
बाकी के लोग कहानी में समय के साथ आते रहेंगे)


आज मेरा 12th का रिजल्ट है ...
मुझे पता था...
इस बार भी मैं टॉप करूंगा....
फिर भी इंसान के मन में एक डर होता है।


वही सब कुछ मेरे अंदर भी था....
कहीं कोई और टॉप कर गया तो...
पर मुझे इस बात की परेशानी थी कि कहीं टॉप 3 की रैंकिंग में मेरा नाम नहीं आया तो?


इसी उधेड़बुन में मैं स्कूल पहुंच गया...
सभी विद्यार्थी एक बड़े हॉल की तरफ जा रहे थे।


जब मैं हॉल में पहुंचा तो हॉल खचाखच भरा हुआ था...
सभी सीट बुक हो गई थी...
मुझे कहीं भी बैठने के लिए जगह नहीं मिली इसलिए मैं एक तरफ खड़ा हो गया।


फिर कुछ देर बाद प्रिंसिपल मैम स्टेज पर आई...
और माइक अपने हाथ में ले लिया....
और बोलना शुरू किया।


प्रिंसिपल मैम:- मेरे प्यारे विद्यार्थियों....
मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे स्कूल का रिजल्ट इस बार बहुत अच्छा आया है....
बस कुछ विद्यार्थियों को छोड़ के सभी का रिजल्ट बहुत अच्छा रहा...
और एक सबसे बड़ी खुशखबरी की बात ये है कि हमारे स्कूल के एक विद्यार्थी ने पूरे स्टेट में टॉप किया है।


पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा...
फिर प्रिंसिपल मैम सभी का रिजल्ट अनाउंस करने लगी।


सभी स्टेज पर जाकर अपना रिजल्ट लेने लगे....
फिर आई टॉप 3 की बारी थर्ड नंबर पर हमारे स्कूल की एक लड़की थी...
सेकंड नंबर पर भी एक लड़की थी...
मेरा दिल धक धक करने लगा....
क्योंकि वहां हॉल में हम चार लोग थे जिनका रिजल्ट अनाउंस नहीं हुआ था...


प्रिंसिपल मैम की बात सुनकर हम चारों लोग के पसीने छूटने लगे कि आखिर कौन है वो टापर और कौन 3 फेल है...
पर मुझे यकीन था कि मैं ही टॉप करूंगा।


प्रिंसिपल मैम तो विद्यार्थियों पहले मैं आप सबको फेल होने वालों के नाम बताऊंगी...
पहला नाम है राहुल सिन्हा.....
दूसरा नाम है पुलकित शर्मा...
और तीसरा नाम है क्या कोई बता सकता है?


सभी मेरा नाम पुकारने लगे....
और यहां हमारे दोनों के पसीने छूट रहे थे...
प्रिंसिपल मैम:- तो विद्यार्थियों तीसरे फैलियर का नाम है प्रताप सिंह....
अब आप लोगों को टॉपर का नाम भी पता चल ही गया होगा।


And the name us Deep Verma the topper of our state give big hands to him.
दीप वर्मा आप स्टेज पर आए।


मैं तो ये खबर सुनकर अंदर से बहुत खुश हूआ..
फिर मैं स्टेज की ओर बढ़ने लगा...


सभी अध्यापक और विद्यार्थी मुझे खा जाने वाली निगाहों से देख रहे थे...
मैं स्टेज पर पहुंचा और झुक के प्रिंसिपल मैम के पैर छू लिए....
प्रिंसिपल मैम ने मुझे गले से लगा लिया....


पूरे स्कूल में एक प्रिंसिपल मैम ही थी जो मुझसे प्यार करती थी....
वरना सभी अध्यापक और विद्यार्थी मुझसे नफरत करते थे..


प्रिंसिपल मैम मुबारक हो मेरे बच्चे.....
इस बार भी तुम ने मेरा सिर ऊचा कर दिया है..
विद्यार्थियों दीप को पूरे राज्य में टॉप करने की खुशी मे अपने शहर के बेस्ट कॉलेज में स्कॉलरशिप मिला है।
तो तालियों से दीप को बधाई दीजिए....


एक बार फिर हॉल में तालियों का शोर सुनाई देने लगा...

फिर मैं अपना रिजल्ट लेकर स्टेज से नीचे आ गया....


सभी लोग वापस अपने अपने घर जाने लगे...
मैं भी अपने घर जाने लगा जैसे ही गेट से बाहर निकला कि!
अचचचाननननक......

जैसे ही गेट से बाहर निकला अचानक किसी ने मेरा रास्ता रोक लिया।


वो कोई और नहीं बल्कि हमारे स्कूल के सबसे बिगड़े हुए लड़के थे...


पहला लड़का:- क्यों बे टॉपर कहां चल दिया...
मै:- घर जा रहा हूं भाई...
क्या आप मेरा रास्ता छोड़ देंगे।


दूसरा लड़का:-क्यों नहीं इतनी भी क्या जल्दी है....
हमसे अपने टॉपर होने का गिफ्ट तो लेता जा...
मै:-भाई मुझे कोई गिफ्ट नहीं चाहिए....
क्या आप मुझे जाने देंगे....


तीसरा लड़का:- क्यों बे म****** तुझे सुनाई नहीं देता...
तुझे रुकने के लिए बोला ना तो रुक...


मै:- देखो भाई मां की गाली मत दो वरना...
दूसरा लड़का:-वरना क्या बे...
प्रिंसिपल को कमप्लेंट करेगा....
जा मुन्ना जा....



ये कहकर तीनों लड़के हंसने लगे...
मै:- देखो भाई लोग ये ज्यादा हो रहा है।


तीसरा लड़का:-ये ऐसे नहीं मानेगा...
इसे सबक सिखाना ही पड़ेगा...
तेरी मां की साले...
वो लड़का इतना बोल मुझे मारने के लिए आगे बढ़ा।
उसने मेरे मुंह पर पंच मारना चाहा...


मैं ट्विस्ट करके साइड हो गया और उसी वक्त उसके पेट के दाएं तरफ पंच मार दिया...
जिससे वो नीचे गिर पड़ा और कराहने लगा...


( मुझे लड़ना तो नहीं आता....
पर पार्क में सुबह जब मैं जोगिंग पे जाता हूं तो वहां एक टीचर अपने स्टूडेंट को कुछ कराटे वगैरा और आत्मरक्षा सिखाता है.....
इसलिए कुछ मूव मैंने भी सीख लिए)


मै:- मैंने पहले ही कहा था कि मुझे मां की गाली मत देना....
पर इसने नहीं सुना अब भुगत...


दूसरा लड़का भी मुझे मारने को बढ़ा...
पर मैंने आगे बड़ के नीचे बैठ के एक टविस्टग किक उसके पैरों पर मारी...
जिससे वो हवा में गुलाटी खाता हुआ नीचे गिर पड़ा...
जैसे ही मैं खड़ा हुआ!
किसी ने पीछे से मेरे सिर पर किसी सख्त चीज से वार किया...


मुझे सिर मैं बहुत ज्यादा दर्द होने लगा...
और खून भी बहने लगा जब मैंने पीछे पलट के देखा तो पीछे पहला लड़का एक बेसबाल बैट लिए खड़ा था।


जैसे ही वो दोबारा मुझे मारने को हुआ....
मैंने आगे बढ़ के बेसबॉल बैट को पकड़ लिया...
और एक पंच उसके पेट में दे मारा....
वो भी पेट पकड़कर नीचे बैठ गया...
फिर मैंने उसके मुँह पर एक किक जड दी...
वो वही लेट के तड़पने लगा...


हमारे चारों तरफ काफी भीड़ जमा हो गई थी।


प्रिंसिपल मैम और बाकी के अध्यापक भी वहां पहुंच गए....
पहला अध्यापक:- क्या हुआ यहां?
दूसरा लड़का:- सर इसने हमे मारा!
पहला अध्यापक:- क्यों बे लड़के तुने इन्हे क्यों मारा?


मै:-सर लड़ाई इन्होंने शुरू की थी...
और इन्होंने मुझे मां की गाली भी दी...


इतने में प्रिंसिपल मैम ने आगे बढ़कर उन तीनों लड़कों को थप्पड़ मार दिया।


पहला अध्यापक:- मैम ये आप क्या कर रही है...
गलती उस लड़के की है...


प्रिंसिपल मैम:- गलती उसकी नहीं इनकी है...


दूसरा अध्यापक:- आप इतने विश्वास के साथ कैसे कह सकती हैं कि गलती इनकी है और उस लड़के कि नही?


प्रिंसिपल मैम:- क्योंकि मैं दीप को कई सालों से जानती हूं...
वो कभी भी झूठ नहीं बोलता..
समझे..
(उन तीनों से) दफा हो जाओ यहां से...


वो तीनो मुझे घूरते हुए वहां से चले गए...
इतने में मुझे चक्कर आने लगे और मैं बेहोश होने लगा।


और कुछ ही पलों में नीचे गिर पड़ा.....


प्रिंसिपल मैम की निगाह जब मुझ पर पड़ी तो वो भाग के मेरे पास आ गई।


जब उन्होंने मेरे सिर के पीछे हाथ लगाया तो उन्हें वहां कुछ गिला गिला सा महसूस हुआ।
जब उन्होंने अपना हाथ देखा तो वहां खून लगा हुआ था।


प्रिंसिपल मैम हे भगवान खून...
खड़े-खड़े मेरा मुंह क्या देख रहे हो?
जल्दी से इसे मेरी गाड़ी तक पहुंचाओ।


फिर कुछ अध्यापकों ने मुझे उठा के प्रिंसिपल मैम की गाड़ी मे लिटाया....
प्रिंसिपल मैम ने मेरा सिर अपनी गोद में रख लिया...
और ड्राइवर को गाड़ी हॉस्पिटल ले जाने के लिए कहा।



जल्द ही हम लोग हॉस्पिटल पहुंच गए...
मैम ने वार्ड बॉय को बुलाकर मुझे स्ट्रेचर पर लिटाया और अंदर ले गई....
डॉक्टर ने मेरे सिर पर पट्टी कर दी....
प्रिंसिपल:- डॉक्टर दीप अभी कैसा है?


डॉक्टर:-ये अब ठीक है....
ज्यादा खून बह जाने की वजह से शरीर में कमजोरी आ गई और वो बेहोश हो गया....
अगर थोड़ी सी देर हो जाती तो....
इसे बचाना मुश्किल हो जाता...
बस कुछ देर बाद इसे होश आ जाएगा।


प्रिंसिपल मैम:- धन्यवाद डॉक्टर।


फिर डॉक्टर वहां से चला गया...
मैम वहां मेरे पास ही बैठी रही...


करीब रात के 8:00 बजे मुझे होश आया...
मैंने देखा मैं कहीं नई जगह पर हूं....
फिर मुझे दवा की स्मेल आने लगी....
मैं समझ गया....
मै हॉस्पिटल में हूं....
फिर मै अपने चारों तरफ देखने लगा...
प्रिंसिपल मैम मेरे पास ही बैठी थी....
प्रिंसिपल मैम ने जब मुझे होश में आते देखा तो वो उठ के मेरे पास आ गई और मेरे माथे को चुम के बोली..
प्रिंसिपल मैम:- अब कैसी तबीयत है बेटा तुम्हारी?


मै:- अभी अच्छा हूं....
पर मैं यहां कैसे?



प्रिंसिपल मैम:-मैं तुम्हे यहां लेकर आई हूं।
तुम्हारे सिर पर चोट लगी थी...
जिससे तुम्हारा बहुत खून बह गया...
और बेहोश हो गए...
फिर मैं तुम्हें यहाँ ले आई।
पर तुम मुझे ये बताओ कि तुमने उनसे झगड़ा क्यों किया??


मैं:-(भोली सी सूरत बना के)मैम झगड़ा मैंने नहीं उन्होने शुरू किया था...


फिर मैंने मैम को वहां पे जो कुछ हुआ सब बता दिया।


प्रिंसिपल मैम:- चलो कोई बात नहीं तुम यहीं रुको मैं डॉक्टर के पास हो के आई...
तुम्हें डिस्चार्ज करवाना है।


फिर मैम रुम से बाहर चली गई....
कुछ देर बाद वो रूम में वापस आई....
उनके साथ डॉक्टर भी था....
फिर डॉक्टर ने कुछ चेकअप किया...
और कुछ दवा लिखकर मुझे डिस्चार्ज कर दिया।
फिर हम प्रिंसिपल मैम की कार में बैठकर घर को निकल गए.....
मैंने मैम को अपने घर चलने को कहा....


मै:- मैम प्लीज मुझे मेरे घर छोड़ दीजिए...
प्रिंसिपल मैम:- चुपचाप बैठे रहो....
तुम मेरे साथ मेरे घर जा रहे हो....
तुम्हारे सिर पर काफी चोट आई है और तुम काफी कमजोर भी हो गए हो.....
और तुम अपने घर में अकेले रहते हो...
कोई भी तुम्हारी देखभाल करने वाला नही....
तो अब चुपचाप मेरे घर चलो समझे।


मै:-पर मैम....
प्रिंसिपल मैम:-(बीच में ही बात काटते हुए)कोई एक्सक्यूज नही....
अब तुम मेरे साथ चल रहे हो तो चल रहे हो समझे।


मैंने सिर्फ हां मैं गर्दन हिला दी।
जिसे देख प्रिंसिपल मैम के होठो पर मुस्कुराहट आ गई.....
उन्होंने मुझे गले लगा लिया....


प्रिंसिपल मैम:- देट्स लाइक ए गुड बॉय....


मैम ने मुझे लिटा के मेरा सिर अपनी गोद में रख लिया....
जल्दी ही हम मैम के घर के बाहर थे....


मैम के घर में सिर्फ उनके पति उनकी बेटी और वो ही रहती थी...
उनका घर दो मंजिला था....


घर के गेट से एंटर होते ही सामने सीटिंग हाल था....
उसके एक साइड में डाइनिंग टेबल था और उसी साइड किचन भी था सीटिंग के दूसरी साइड तीन रूम थे।
एक रूम मैम का दूसरा गेस्ट रूम और तीसरा स्टोर रूम....


फर्स्ट फ्लोर पर भी 3 रूम थे...
एक उनकी बेटी का और बाकी के गेस्ट रूम थे।



( मैम की फैमिली का थोड़ा सा परिचय हो जाए....
मैम कविता वर्मा उम्र 36....
दिखने में खूबसूरत....
दिल की साफ....
इनका काम है सिर्फ प्यार बांटना.....
हमेशा खुश रहती है


मैम की बेटी प्रीत शर्मा उम्र 16...
बिल्कुल प्यारी सी गुड़िया....
इकलौती बेटी....
शरारती और समझ दोनों का कंबीनेशन है)


जब हम घर पहुंचे तो मैम के हस्बैंड हॉल में सोफे पर बैठे थे...
जब उनकी नजर हम पे पड़ी तो वो उठ के हमारे पास आ गए...


दीपक:-कविता कहां थी तुम आज काफी देर हो गई?
अगर कोई जरूरी काम था तो बता तो देती....
उपर से फोन भी नहीं उठा रही थी।


कविता मैम:- सॉरी वो मैं भूल गई थी...
और फोन साइलेंट पर था....


फिर दीपक अंकल की नजर मुझ पर पड़ी।


दीपक:- ठीक है...
वैसे ये लड़का कौन है?
तुमने परिचय नहीं करवाया!


कविता मैम:- खुद पहचानो...
दीपक:- ओह्हहह तो ये चैलेंज है?
तो सोचने तो कौन हो सकता है....
हां कही ये दीप तो नहीं?


दीपक अंकल की बात सुन मैं सन्न रह गया....
फिर मैंने मैम की तरफ देखा जो मुस्कुरा रही थी.....
उन्होंने अंकल की तरफ हां में गर्दन हिला दी...
अंकल ने भी मुझे गले से लगा लिया....


फिर मुझे अलग करके बोले
दीपक:- पर इसके सिर पे ये पट्टी कैसी?


उसके बाद जो कुछ आज स्कूल में हुआ मैम ने वो सब कुछ अंकल को बता दिया।



दीपक:- चलो कोई बात नहीं...
आओ बैठो...
फिर हम सभी सोफे पर बैठ गए।


कविता मैम:- वैसे मेरी गुड़िया कहां है?
दीपक:- वो अभी तक अपने रूम में पढ़ाई कर रही है। कविता मैम:- हे राम डिनर किया कि नहीं उसने?


दीपक:- तुम्हारी लाडली है....
मैं तो कह-कह के थक गया...
पर वो बोली मां के साथ ही खाऊंगी।


कविता मैम:- चलो मैं ही बुला कर आती हूं उसे।


कविता मैम:-(एक नौकर से) हरिया जाके रामू से कहो वो दीप के लिए खिचड़ी बना दे।


हरिया:- जी मालकिन....


फिर कविता प्रीत के रूम की ओर बढ गई।


इधर दीप इस सोच में डूबा था कि...
मैम उसे इतना प्यार कैसे करती है बाकी सभी तो उससे नफरत करते है....


उधर मैम प्रीत के रूम के पास आ चुकी थी।
उन्होंने जा के प्रीत का डोर नॉक किया...
नॉक नॉक...


प्रीत:- पापा मैंने कह दिया ना मुझे भूख नहीं है...
फिर आप क्यों बार-बार आ रहे है....
कविता मैम:- अच्छा बेटा जी मेरे साथ भी नहीं खाओगी...



जैसे ही प्रीत ने अपनी मां की आवाज सुनी...
उसने भाग के दरवाजा खोला...
और अपनी मां के गले लग गई...
प्रीत:- मां आप आ गई...
मैम ने उसे अपने से अलग किया और उसका गाल चूम लिया।


कविता मैम:- जी मेरी गुड़िया...
प्रीत:- तो फिर जल्दी जल्दी नीचे चलो मुझे बहुत भूख लगी है...
मैम मजे लेने के मूड मे..


कविता मैम:- लेकिन तुम्हें भूख नहीं थी अब तो तुम सिर्फ मेरे लिए खा रही हो..।
प्रीत:- तो जाओ मुझे सच में नहीं खाना...
और उसने मुंह फुला लिया...
कविता मैम:- अरे अरे मेरी गुड़िया तो गुस्सा हो गई..
मैं तो मजाक कर रही थी।


कविता मैम:-सॉरी बाबा....
अब माफ भी कर दो....
प्रीत:- नहीं करूंगी...नहीं करूंगी...
जाओ आप यहां से..
कविता मैम:- अच्छा तो ठीक है...
तो मैं तुम्हारे हिस्से का खाना तुम्हारे भैया को खिला दूँ?


प्रीत ने जैसे ही मैम की ये बात सुनी तो वो फौरन अपनी मां की तरह देखने लगी!


प्रीत:- मां क्या सच में भैया आए है?
कविता मैम ने सिर्फ हां में गर्दन हिला दिया।


प्रीत खुशी से उछल पड़ी।


प्रीत:- क्या सच्ची में दीप भैया आए हैं?
तो चलो ना जल्दी से मुझे उनसे मिलना है।


फिर कविता मैम और प्रीत नीचे आ गई...
मैं और अंकल अभी भी सोफे पर बैठे थे.....


प्रीत भागकर मेरी और आने लगी....
मैं भी खड़ा हो गया...
खुशी से नही....
मैं तो इसलिए खड़ा हुआ था कि ये लड़की मेरी तरफ क्यों भागी आ रही।


इतने में प्रीत आ के मेरे गले लग गई।


प्रीत:- मेरे भैया आ गए...
मेरे भैया आ गए...
अब मैं अपने भैया को कहीं नहीं जाने दूंगी (अपना चेहरा ऊपर करके)
बोलो ना भैया मुझे छोड़ कर तो नहीं जाओगे।



मैंने सिर्फ ना मैं गर्दन हिला दी...


क्योंकि तब मेरा दिमाग चल ही नहीं रहा था।


मैं तो इस बात से हैरान था!
कि प्रिंसिपल मैम का पूरा परिवार मुझे जानता था।




फिर जब उसने मेरे सिर पे पट्टी देखी तो मुझसे पूछा....


प्रीत:- भैया ये आपके सिर पे क्या हुआ?


मै:-कुछ नहीं गुड़िया वो थोड़ी सी चोट लग गई थी..
प्रीत:- आप भी ना भैया...
बिल्कुल बच्चे हो बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखते हो अपना...
आओ मेरे साथ डिनर करो और फिर आप रूम में जाना है आराम करने समझे कि नही?


मैंने सिर्फ हां में सिर हिलाया...
मैम और अंकल वहां बैठे मुस्कुरा रहे थे..


फिर हम लोग डाइनिंग टेबल पे बैठ गए।


प्रीत:- आज मैं अपने भैया को अपने हाथ से खिलाऊंगी... खाओगे ना मेरे हाथ से....


मैंने इस बार भी सिर्फ हां मैं गर्दन हिलाई।


फिर प्रीत मुझे अपने हाथों से खिलाने लगी....
मुझे आज तक सिर्फ नफरत ही मिली थी...
आज मैं इतना प्यार सहन ना कर पाया और मेरी आंखों से आंसू निकल आए।
मेरी आंखों में आंसू देखकर प्रीत ने मैम से कहा....


प्रीत:- मां देखो भैया रो रहे है।


मैम उठ के मेरे पास आ गई...


कविता मैम:- क्या हुआ बेटा रो क्यों रही हो....


मै:- कुछ नहीं मैम आज तक मैंने सिर्फ लोगों की नफरत ही देखी है आज आप लोगों के द्वारा मिला प्यार सहन नही हुआ....
और मेरी आंखों से अपने आप आंसू निकल आए।


ये सुनकर मैम ने मुझे गले लगा लिया....


कविता मैम:- अरे मेरा बच्चा...
बस चुप हो जा....



इतने ने प्रीत बोली!


प्रीत:-मां आपने सही कहा भैया सच में ही बच्चे हैं देखो तो कैसे बच्चों की तरह रो रहे है।


प्रीत की बात सुनकर सभी मुस्कुरा दिए।


फिर हम सब ने अपना डिनर कंप्लीट किया...


फिर सभी वहां बैठकर बातें करने लगे।

डिनर के बाद हमने कुछ देर बातें की...


इस बीच मैम ने मुझे दवा भी दे दी....


फिर मुझे ग्राउंड फ्लोर पर ही गेस्ट रूम में ले जाकर लिटा दिया।
फिर मैम लाइट बंद करके चली गई....
बाकी सभी भी उठ के अपने अपने रूम में चले गए।


मैं रात पता नहीं कितनी देर तक जागता रहा और सोचता रहा कि आखिर मैम और उनका परिवार मुझसे इतना प्यार क्यों करते है।


पर फिर मैं सारी बातें झटक कर सो गया।


#####नई सुबह हुई#####


पता नहीं ये सुबह किसके लिए क्या लाने वाली है।
प्रीत आज सबसे पहले उठी....
इस दिन का इंतजार ना जाने उसने कब से किया था.... उसका हर वक्त यही ख्वाब था कि...
उसका भी कोई भाई हो और वो उसे प्यार से उठाएं...
और वो सपना भी आज पूरा होने वाला था।


वो जल्दी से उठी...
और अपने रूम का दरवाजा खोल के नीचे के फ्लोर की ओर भागी.....
पर शायद अभी उसका सपना पूरा होने का वक्त नहीं आया था.....
वो जैसे ही सीढ़ियों के पास पहुंची कि उसका पैर फिसल गया उसके मुंह से चीख निकल गई....


प्रीत:-मममममममी!


और वो सीढ़ियों पे गिरने लगी....
वो लुढकती हुई सीढ़ीयो से नीचे की ओर जा रही थी...
जब वो आखरी सीढ़ी पर पहुंची तो उसका सिर सीढी की नोक से टकरा गया!
उसके सिर से खून निकलने लगा....
और वो बेहोश हो गयी।


सभी लोग भाग के उसके पास पहुंचे...
सभी की आंखों में आंसू आ गए।


कविता मैम:- (रोते हुए) गुड़िया बेटा उठ जा....
बेटा देख तेरी मां तेरे पास है....
(अंकल से)दीपक देखो हमारी गुडिया उठ क्यों नही रही है!
उसे उठाओ प्लीज!


दीपक अंकल ने जल्दी से प्रीत को गोद में उठाया.....
और बाहर की ओर भागे....


बाहर आकर उन्होंने गुड़िया को कार की पिछली सीट पर लिटाया...
गुड़िया के साथ पीछे मैम भी बैठ गई।


मैं अंकल के साथ आगे बैठ गया....
मैं और आंटी उसे उठाने की पूरी कोशिश कर रहे थे।


जल्दी ही हम लोग हॉस्पिटल पहुंच गए।


प्रीत को OT मे ले जाया गया.....
3 घंटे तक ऑपरेशन चलता रहा...
फिर डॉक्टर बाहर आ गए।


कविता मैम:- डॉक्टर मेरी बच्ची कैसी है?


डॉक्टर:-देखिए अभी हम कुछ नहीं कह सकते....
उसके सिर पर काफी चोट लगी है.....
और खून भी काफी बह गया है.....
इसलिए अभी पेशेंट को ऑब्जरवेशन में रखना होगा.....
अगर उन्हें कल तक होश नहीं आया तो वो कोमा मे भी जा सकती है।


ये सुनकर हम सभी की आंखों से झर-झर आंसू बहने लगे....
जल्दी प्रीत को रूम में शिफ्ट कर दिया गया।


मैम और अंकल उसके पास चले गए.....
मैं बाहर ही बैठ गया...
मेरे मन में कुछ चल रहा था....
कुछ देर बाद में उठ के चल दिया।


कहां पता नही....
बस चलने लगा.....
मैं कुछ कदम ही चला था कि मुझे हॉस्पिटल में एक मंदिर दिखा!


मैं जाकर मंदिर के सामने हाथ जोड़कर घुटनों के बल बैठ गया।
मै:- हे भगवान क्यों लिखा है ये सब मेरी किस्मत में?
जो भी मेरे करीब आता है....
उसके साथ हमेशा बुरा होता है....
बड़ी मुश्किल से कोई मुझे प्यार करने लगा था....
पर वो भी ज्यादा वक्त नहीं चला....
क्यों भगवान आखिर क्यो.....

मेरी उस प्यारी सी गुड़िया प्रीत की क्या गलती है.....
वो तो फूल जैसी बच्ची है....
उसके साथ इतना बुरा क्यों किया?
जो कुछ करना है मेरे साथ करो...
उस बच्ची को बचा लो भगवान....
मेरी गुड़िया को बचा लो भगवान.....
मैं वादा करता हूं कि मैं उससे हमेशा के लिए दूर हो जाऊंगा.....
बस मेरी गुड़िया को ठीक कर दो....
मेरी मनहूशियत का साया उसके ऊपर ना पड़े....
भगवान प्लीज एक बार उसे होश आ जाए...
फिर मैं उससे दूर हो जाऊंगा....
प्लीज भगवान....
प्लीज।


इधर में भगवान के आगे प्रार्थना कर रहा था।
और कोई था जो भी बातें सुन रहा था....
ये कोई और नहीं मैम थी!


दरअसल बात ये है कि जब मैम अंदर प्रीत के पास बैठी तो एकदम से उनके दिमाग में मेरे बारे में ख्याल आया...
फिर मैम ने मुझे इधर-उधर देखा...
पर मै रूम में नहीं था....
फिर वो बाहर आ गई।


जब वो बाहर आई तो मैं उनको बेसुध सा कहीं जाता हुआ दिखाई दिया।
उन्होंने मुझे आवाज लगाई पर मैंने नहीं सुना..
फिर मैम भी मेरे पीछे आ गई....
फिर मैं मंदिर में चलते चलते बैठ गया।


मैम भी मेरे पीछे ही थी..।।
मैम के मुझ तक पहुंचने तक मैने अपनी प्रार्थना शुरू कर दी थी...
जो कि मैम ने भी सुन ली....


और मेरे साथ साथ उनकी भी आंखों में आंसू थे।


फिर मैम पलट के वहां से चली गई।
मैं भी वहां से उठकर वापस रूम के पास आकर बैठ गया...
मैम अभी प्रीत के पास ही बैठी थी...
पर उनके दिमाग में मेरी ही बातें घूम रही थी!



ऐसे ही पूरा दिन बीत गया...
और रात भी...
पर प्रीत को होश नहीं आया था...


अगले दिन....
दोपहर का वक्त था पर अभी भी प्रीत को होश नहीं आया था...
अब सभी के दिल का डर बढने लगा था....
क्योंकि अगर प्रीत को होश नहीं आया...
तो प्रीत कोमा में चली जाती।


दोपहर के 1:30 का टाइम था...
मैम प्रीत के पास ही बैठी थी।
कविता मैम:-बेटा उठ जा ना.....
क्यों अपनी मां को तड़पा रही है.....
बेटा उठ जाना तेरी मम्मा की जान निकल जाएगी प्लीज बेटा.....


इधर मैं भी मन ही मन प्रीत के ठीक होने की दुआ मांग रहा था...


पर कहते हैं ना भगवान के घर देर है अंधेर नही।
शायद ये कहावत किसी ने सच ही बनाई है....


मैम प्रीत के हाथ पे सिर रख के रो रही थी....
कि तभी अचानक!

मैम प्रीत के हाथ पर सिर रखकर रो रही थी...
कि तभी अचानक मुझे कुछ याद आया....
मैं उठा और हॉस्पिटल के गेट से बाहर आया....
और ऑटो पकड़ के कहीं चल दिया।

कुछ देर बाद ऑटो कहीं जाकर रुका!
जहां ऑटो रुका था वहां एक मंदिर था।

जैसे जैसे मैं आगे बढ़ रहा था......
कुछ यादे मेरी आंखों के सामने आ गई....
इस मंदिर मे मै अक्सर अपनी मां के साथ आया करता था..
अपनी मां के गुजरने के बाद भी मै कभी-कभी यहां आता था....


जैसे-जैसे मैं आगे बढ़ता गया....
मेरी यादें ताजा होती गई....
और आंखों से आंसू भी बहने लगी।

मैं चलता हुआ मंदिर मे जा पहुंचा....
और माता रानी की मूर्ति के आगे घुटनों के बल बैठ गया!

मै:- माता रानी मेरी मां कहती थी कि आप सब की रक्षा करती है....
दीन दुखियों के दुख हरती है....
आपके आगे जिसने भी झोली फैलाई है....
आपने हमेशा उसकी झोली भरी है....
आज मैं भी आपके सामने झोली फैला रहा हूं....
मुझ भिखारी की भी झोली भर दो माता....
मेरी गुड़िया को ठीक कर दो....
ये सब मेरी मनहूसियत के कारण हुआ है...
जैसे जैसे मैं किसी के करीब होता जाता हूं....
वैसे वैसे उसके साथ कोई ना कोई हादसा होता रहता है...
मैं आपसे वादा करता हूं कि मैं गुड़िया और मैम की फैमिली से दूर चला जाऊंगा....
प्लीज माता रानी मेरी गुड़िया को ठीक दो प्लीज माता रानी....
मेरी गुड़िया को ठीक कर दो।

उसके बाद मैं वही फूट फूट कर रोने लगा।

मैं कुछ देर तक वही बैठा रोता रहा...
फिर किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा!!

पुजारी जी:- बेटा ऐसे निराश मत हो....
माता रानी पर विश्वास रखो...
वो सब ठीक करेंगी....
माता रानी उनकी पुकार जरूर सुनती हैं जो सच्चे दिल से प्रार्थना करते है...
तुम अपनी परेशानी बताओ।


मै:-बाबा मेरी गुड़िया के सिर पर चोट लगी है...
उसकी हालत गंभीर बनी हुई है....
डॉक्टर ने कहा है कि अगर उसे होश नही आया तो वो कोमा में जा सकती है।

मेरी बात सुन के पंडित जी मंदिर के अंदर चले गए...
कुछ देर बाद वो वापस आए!!!

पंडित जी:- ये लो!

इतना बोल उन्होंने एक छोटी सी कांच शीशी मुझे पकड़ा दी....
उसमें कुछ बूंदे घी की थी...
इसे अपनी बहन के माथे पर लगा देना...
और फिर उसकी आंखों पर...
माता रानी कृपा करेंगी।

फिर पंडित जी वहां से चले गए....
और मैं उठा माता को प्रणाम किया और चल पड़ा वापस हॉस्पिटल!
जल्दी ही मैं हॉस्पिटल पहुंच गया....


फिर मै जाके प्रीत के रूम में घुस गया....
मैम अभी भी प्रीत के बेड पे सिर रख के बैठी थी।

मैने आगे बढ़ के वो घी प्रीत के माथे और आंखों पर लगा दिया...।
और माता रानी से प्रीत को ठीक करने की दुआ मांगने लगा।

फिर मैं बाहर आ गया....
और सीसे से अंदर देखने लगा...

कुछ देर बाद प्रीत के हाथ में हलचल होने लगी!

फिर धीरे-धीरे उसने आंखे खोली...
फिर उसने इधर उधर देखा....
मैम उसके बेड पे सिर रख के लेटी हुई थी....
उसने मैम को आवाज लगाई।

प्रीत:- (धीमी आवाज में)मम्मी..

प्रीत की आवाज सुन मैम एकदम से उठ बैठी....
जब उन्होंने प्रीत को उठा हुआ देखा तो.....
वो बहुत खुश हुई...
वो उठ के प्रीत का चेहरा चूमने लगी।


कविता मैम:- मेरी बच्ची तू ठीक तो है?

प्रीत:- हां मां...
बस सिर में थोड़ा सा दर्द है।

कविता मैम:- चलो कोई बात नहीं वो भी ठीक हो जाएगा...
इतने मे मै डॉक्टर को बुला लाया...
डॉक्टर ने चेकअप किया...
और बोला!!


डॉक्टर:- अब आपकी बच्ची खतरे से बाहर है....
कविता मेम :- थैंक्स डॉक्टर...

फिर डॉक्टर वहाँ से चला गया।
मैं भी बाहर आ गया..
फिर मैम ने प्रीत से कुछ देर बाद की।

उसके बाद मैम ने मुझे आवाज लगाई...
मैं अंदर गया....

और जा के प्रीत के पास खड़ा हो गया।

मै:- अब कैसी है मेरी गुड़िया??

प्रीत:- मै ठीक हूं भैया।


मै:- चलो तुम आराम करो ।
उसके बाद मैं कुछ देर उसके पास और बैठा...
फिर नर्स आ गई और उसे नींद का इंजेक्शन लगा दिया...

जिससे उसे नींद आ गई।


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